Nurisng colleg scam in mp-हाईकोर्ट के आदेश पर पांच नर्सिंग कॉलेज किये गए सील फर्जी कॉलेजों के संचालक हुये डर के मारे जमींदोजद

इंदौर – देश और दुनिया में सुर्खियां बटोरने वाला मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाले के मामले में इंदौर के 5 नर्सिंग कॉलेज को सोमवार को सील कर दिया गया है बताते चलें कि राजस्व और चिकित्सा विभाग की टीम के द्वारा इन कॉलेजों के गेट पर हाई कोर्ट के नोटिस चस्पा किए गए हैं और इन्हें सील कर दिया गया है बताते चलें कि आज भी मध्यप्रदेश में तमाम ऐसे कॉलेज हैं जो कि फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं और यह छात्रों के भविष्य से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं|

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5 फर्जी कॉलेजों को किया गया सील

सूत्रों के मुताबिक जानकारी मिली है कि सोमवार दोपहर अचानक इन कॉलेजों में पहुंची छापामार टीमों के द्वारा यहाँ पर मौजूद कर्मचारियों से गहनता से पूछ्ताछ भी की गई बताते चलें कि हाल ही में इन कॉलेजों में अनियमितताओं के चलते हाईकोर्ट ने कार्रवाई करने के आदेश दिए थे जिसके बाद सोमवार शाम को एसडीएम ओमप्रकाश बड़कुल एसडीएम घनश्याम धनगर सहित प्रशासन की अलग अलग टीमों के द्वारा कॉलेजों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई दत्तात्रेय राय ऐकेडमी,वर्मा यूनियन नर्सिंग ,ऋतु जैन नर्सिंग और देवी आलिया नर्सिंग कॉलेज को तत्काल सील कर दिया गया|

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रिश्वत लेते पकड़े जा चुके हैं अधिकारी

एक रिपोर्ट के मुताबिक नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े की शुरुआत 2020 में हुई थी 2019 तक मध्यप्रदेश में 450 नर्सिंग कॉलेज रजिस्टर थे और आज भी तमाम ऐसे कॉलेज हैं जो कि फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं जिसे जांच एजेंसी को इसकी जांच सौंपी गई थी उसके अधिकारी ही मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज के संचालकों से रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चूके हैं इसलिए जितनी भी जांच हुई है वह जांच भी अब संदेह के घेरे में है|

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हाई कोर्ट में दायर की गई है याचिका

गौरतलब है कि जबलपुर के वकील विशाल बघेल और ग्वालियर में वकील दिलीप शर्मा के द्वारा कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है इन याचिकाओं को सुनने के बाद कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को दे दी थी सीबीआइ ने पहले चरण में प्रदेश की 700 से ज्यादा नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 308 कॉलेजों की जांच की थी जिसमें सीबीआइ ने 169 नर्सिंग कॉलेजों को सूटेबल यानी पूर्ण 66 कॉलेजों को अनसूटेबल यानी अपूर्ण कैटेगरी में रखा था जबकि 73 कॉलेजों को अनुपयुक्त बताया था इन सभी कॉलेजों में 1,00,000 से अधिक छात्रों ने पैसा जमा करके एडमिशन लिया था लेकिन सीबीआइ के अधिकारी ही रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे जिसके बाद मैं अब ये जांच भी संदेहास्पद हो गई है|