नीतीश कुमार पर निर्भरता का तोड़ निकाल रही भाजपा किसी कीमत पर नहीं देगी ये 4 मंत्रालय 

नई दिल्ली -2014 तथा 2019 में पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने के बाद भारतीय जनता पार्टी को अब गठबंधन की सरकार चलाने की नौबत आ गई है नरेंद्र मोदी के पास ही सरकार में तीसरी बार वापसी करने के लिए बिना गठबंधन के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है|

गठबंधन सरकार बनते ही नीतीश ने चली पहली चाल 180 डिग्री शॉट मारकर किया कमाल

एनडीए के गठबंधन के जो प्रमुख अंग हैं वह नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू हैं और इन्होंने गठबंधन करने की एवज में भारतीय जनता पार्टी के सामने कई अहम और महत्वपूर्ण मंत्रालयों की मांग भी रख दि है लोकसभा स्पीकर का पद भी गठबंधन के साथी ही चाहते हैं और अग्निवीर  जैसी योजनाओं में भी बदलाव भी उनकी मांग है नीतीश कुमार के इस दबाव में भाजपा थोड़ा चिंता में आ गई है विशेष सूत्रों का यह भी कहना है कि नीतीश कुमार के प्रभाव का तोड़ निकालने के लिए भाजपा ने छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों से बातचीत करना शुरू कर दिया है जिससे की नीतीश कुमार पर उनकी निर्भरता कम हो|

नीतीश के दबाव का काउंटर करने प्लान 

 सूत्र ये बताते हैं कि भाजपा ऐसा मानती है कि नीतीश कुमार भले ही साथ रहें  लेकिन करीब 290 सांसदों को साथ लेकर तीसरी बार सरकार बनाई जाए यानी की जब कभी भी नीतीश कुमार अपनी मांग को लेकर किसी भी प्रकार का दबाव बनाएं  तो उनका मुकाबला किया जा सके इसके अतिरिक्त भाजपा लोकसभा स्पीकर का पद भी नीतीश कुमार को नहीं देना चाहती क्योंकि कभी किसी के समर्थन वापस लेने की स्थिति में उसका रोल काफी अहम हो जाता है तेलुगु देशम पार्टी की नजर स्पीकर के पद पर हैं ताकि सत्ता की कुंजी पकड़ ली जाएं भाजपा इस पद को भी देने में खासकर गठबंधन के साँथीयों को देने में हिचक रही है|

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 भाजपा ने सहयोगी दलों को किया स्पष्ट

भाजपा ने गठबंधन के सभी सहयोगी दलों को यह स्पष्ट कर दिया है की सीसीएस यानी की सुरक्षा से संबंधित मामलों की कैबिनेट समिति के तहत आने वाले मंत्रालय जो की संख्या में चार हैं उन्हें गठबंधन के साथियों को नहीं दिया जाएगा ये मंत्रालय हैं होम मिनिस्ट्री, डिफेन्स वित्त और विदेश मंत्रालय इसके अतिरिक्त भाजपा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भी नहीं देना चाहती है गडकरी ने इस मंत्रालय में बीते 10 सालों में बेहतरीन काम किया है उन्होंने कई एक्सप्रेस वे बनाए हैं|