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Sonebhadra: साढ़े 14 वर्ष पूर्व हुए हीरालाल चौहान हत्याकांड के मामले में सुनवाई करते हुए दोषियों को 10-10 वर्ष की कैद

प्रत्येक पर 14 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर 6-6 माह की अतिरिक्त कैद

पोल खोल सोनभद्र

(राजेश पाठक/दिनेश पाण्डेय)

साढ़े 14 वर्ष पूर्व हुए हीरालाल चौहान हत्याकांड के मामले में वृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम खलीकुज्ज्मा की अदालत ने दोषसिद्ध पाकर दोषियों बबुन्दर, सुरेश, दिनानाथ, आदित्य व लल्लू भारती को 10-10 वर्ष की कैद एवं 14-14 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 6-6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के गोइठहरी गांव निवासी सुभाष चौहान पुत्र हीरालाल ने राबर्ट्सगंज कोतवाली में दी तहरीर में आरोप लगाया था कि 29 मार्च 2008 को बीती रात मेरे पिता हीरालाल व माता लीलावती मकान के बाहर दरवाजे पर अलग-अलग चारपाई पर सो रहे थे। मैं भी अपनी पत्नी सरिता के साथ कमरे में सो रहा था। करीब एक बजे रात को मां के बचाओ, बचाओ की आवाज सुनकर दरवाजा खोलकर मैं और मेरी पत्नी वहां पहुंचे तो देखा कि बबुन्दर, सुरेश, दिनानाथ, आदित्य व लल्लू भारती पिता जी को मारने के लिए मौजूद थे।

उसी समय बबुन्दर ने कुल्हाड़ी से पिता जी के सिर पर 2-3 बार वार कर दिया। शेष सभी लोग ललकार रहे थे और यह कह रहे थे कि हीरालाल आज बचने न पाए। उसके बाद धमकी देते हुए सभी चले गए। कुछ लोगों की मदद से पिताजी को जिला अस्पताल ले आया जहां इलाज के दौरान पिताजी की मौत हो गई। बंटवारे को लेकर करीब डेढ़ साल से झगड़ा हुआ था इसी रंजिश को लेकर पिताजी की इन लोगों ने हत्या कर दी है।

इस तहरीर पर पुलिस ने हत्या समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज किया और पुलिस विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने न्यायालय में राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के गोइठहरी गांव निवासी बबुन्दर पुत्र स्वर्गीय रामचंन्द्र, सुरेश पुत्र अक्षयबर, दिनानाथ उर्फ लल्ले पुत्र प्रधान चौहान, आदित्य पुत्र रामनरेश व लल्लू भारती पुत्र बुधिराम के विरुद्ध हत्या समेत विभिन्न धाराओं में चार्जशीट दाखिल किया।

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषियों बबुन्दर, सुरेश, दिनानाथ, आदित्य व लल्लू भारती को 10-10 वर्ष की कैद एवं 14-14 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 6-6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता कुंवर वीर प्रताप सिंह ने की।

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