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Sidhi : खेतों में पलेवा लगाने के लिए किसानों को है नहरों से पानी छोडऩे का इंतजार

घास फूसों से पट चुकी हैं माइनर नहरें

पोल खोल सीधी

बारिश की अनिश्चितता के चलते जिले में किसानों की रबी सीजन की खेती-किसानी का कार्य पूरी तरह से वैकल्पिक सिंचाई सुविधा पर ही आश्रित हो चुका है। खरीफ सीजन की फसलों की कटाई एवं गहाई का कार्य अंतिम चरण में है। ऐसे में किसानों को रबी सीजन के फसलों की बोनी के लिए खेतों को पलेवा लगाने के लिए पानी की जरूरत है। बारिश न होने से जिन किसानों के पास ट्यूबवेल की सुविधा है वह अपने स्तर से खेतों में पलेवा लगा रहे हैं जिससे समय पर बोनी का कार्य पूर्ण किया जा सके। जिले में बाणसागर नहर की मुख्य नहर में ही पानी चल रहा है। शाखा नहरों से पानी अभी नहीं छोड़ा गया है। वहीं जिले के अन्य सिंचाई बांधों से नहरों में पानी छोडऩे का कार्य फिलहाल अभी नहीं किया गया है।

उधर चर्चा के दौरान जिले के कुछ किसानों ने बताया कि सीधी जिले के उत्तरी क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर बाणसागर नहर से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता है, जबकि अन्य स्थानों पर दो दर्जन सिंचाई बांधों से नहरों के माध्यम से पानी देने की व्यवस्था है। वर्तमान में हालात यह है कि किसी भी सिंचाई बांध से किसानों को रबी सीजन में खेतों में पलेवा लगाने के लिए नहरों में पानी छोडऩे की व्यवस्था नहीं बनाई गई है। ऐसे में किसानों को रबी सीजन में फसलों की बोनी के लिए खेतों में पलेवा लगाने के लिए पानी मिलने का बेसब्री के साथ इंतजार है।

जल उपभोक्ता संथा एवं जल संसाधन के जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी

तत्संबंध में जल उपभोक्ता संथाओं के पदाधिकारी पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। इनसे लगातार क्षेत्रीय किसान आग्रह कर रहे हैं कि नहरों में पानी छोडऩे की व्यवस्था जल्द की जाय, जिससे किसान खेतों में पलेवा लगाकर बोनी का कार्य शुरू कर सके। किसानों का कहना था कि जल उपभोक्ता संथा के पदाधिकारी पूरी तरह से निष्क्रिय हैं। उनके द्वारा अपने क्षेत्र की माइनर नहरों की साफ-सफाई का कार्य भी कराने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। ऐसे में जब सिंचाई बांध से पानी मुख्य नहरों में छोड़ा जाएगा तो घास फूस से पटी माइनर नहरों तक सही तरीके से पानी नहीं पहुंच सकेगा।

खेती-किसानी का कार्य रबी सीजन में शुरू करने के लिए किसान जल्दबाजी में हैं लेकिन उनकी सुविधा के मद्दनजर जल उपभोक्ता संथाओं के अध्यक्ष एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारी पूरी तरह से निष्क्रिय बने हुए हैं। ऐसा आभास होता है कि यह जिम्मेदार किसानों की सुविधाओं को लेकर पूरी तरह से बेपरवाह हैं। किसान किस तरह से रबी सीजन में बोनी का कार्य करेंगे उनका कोई सरोकार नहीं है। जो बड़े किसान हैं उनके द्वारा अपने निजी ट्यूबवेल के माध्यम से खेतों में पलेवा लगाने का कार्य किया जा रहा है वहीं छोटे एवं मध्यम किसान अब भी इस इंतजार में हैं कि सिंचाई बांधों से पानी छोड़ा जाएगा तो वो खेतों में पलेवा लगाकर रबी सीजन की फसलों के बोनी का कार्य शुरू करेंगे।

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