FEATUREDभारतमध्यप्रदेश

Sidhi : परिवार का पालन करने जोखिम,श्रमिक सुरक्षा पर नहीं संजीदगी जानकारी के अभाव मे श्रमिकों को नहीं मिलता योजनाओं का लाभ

 

पोल खोल सीधी

अपना व परिवार का पालन पोषण करने के लिए खुद खुले आसमान के नीचे रहकर लोगों की छत का सपना साकार करने वाले मजदूर वर्षों बाद भी अपनी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।जान को जोखिम मे डालकर मजदूरी करने वाले मजदूरों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ होते हुए बड़ी आसानी से देखा जा सकता है।मकानों से लेकर बिल्डिंगों मे काम करने वाले मजदूरों की जान की कोई सुरक्षा नहीं है।कर्ई बार काम के दौरान घायल हुए मजदूरों को तो समुचित उपचार भी उपलब्ध नहीं हो पाता है।

हादसों के बाद मजदूरों के परिजनों के मरहम पर आंशिक आर्थिक पट्टी लगाकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ली जाती है लेकिन मजदूरों के हीतो को दृष्टिगत रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं की जाती हैं।शासन द्वारा मजदूरों के लिए अनेक योजनाएं व नियम कायदे बनाए जा चुके हैं लेकिन धरातल पर वास्तविकता कुछ ओर ही बयां करती हैं।जिले में सैकडों मजदूर प्रतिदिन विभिन्न क्षेत्रो मे दैनिक मजदूरी करते हैं लेकिन इनमे से महज कुछ के मजदूरों का ही पंजीयन है शेष सभी मजदूर जानकारी के अभाव मे शासकीय सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

ठेकेदारों द्वारा मकानों से लेकर बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों तक मजदूरों से काम तो करवा लिया जाता हैं लेकिन उन्हें सुरक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है।दो समय की रोटी के लिए दूर दराज से मजदूरी करने के लिए आने वाले मजदूर अपनी सुरक्षा की परवाह किए विना प्राप्त निर्देशों का पालन करते है।लेकिन अपने अधीनस्थ काम करने वाले मजदूरों की ठेकेदार कितनी परवाह करते हैं।आधुनिक सुविधाओं से वंचित मजदूर आज की स्थिति में गुलामी का जीवन जीने को मजबूर है।इन मेहनतकश मजदूरों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन भी गंभीर दिखाई नहीं देता है।

शासन-प्रशासन द्वारा मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सैकड़ो नियम तो बना दिए गए लेकिन धरातल पर उनका पालन करवाने मे यह विफल साबित हो रहे हैं।शिक्षा और जानकारी के अभाव मे इन मजदूरों को अपने अधिकारों और नियमों के अनुसार मिलने वाली सुरक्षा से अंजान रहना पड़ता है।जिससे इनकी जान तो जोखिम मे रहती है साथ ही उनके परिवार के ऊपर से भी मुखिया का साया उठने का भय बना रहता है।

यह है नियम:-
शासन के नियमानुसार निर्माण कार्य की कुल लागत का 1 प्रतिशत हिस्सा मजदूरों के लिए बने कल्याण कोष मे (लेबर वेलफेयर)टैक्स के रुप मे जमा करना होता है और शासकीय विभागों द्वारा प्रत्येक रनिंग बिल के दौरान ही यह राशि काटकर शासन के खजाने मे जमा कर दी जाती हैं।मजदूरों की आयु 18 से 60 वर्ष तक की होनी चाहिये तथा उनका श्रम विभाग से पंजीयन भी होना अनिवार्य है।मजदूरी के दौरान यदि कोई मजदूर घायल हो जाता है या उसकी मौत हो जाती है तो उसे मुआवजा देने के प्रावधान भी हैं।वही भवन व संनिर्माण कर्मकार श्रमिक मंडल की कर्ई कल्याणकारी योजनाओं का मजदूरों के लिए कार्ड बनाए जाने का प्रावधान है।इन सब नियमों के बाद भी मजदूरों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

कार्य स्थल पर होनी चाहिए सुविधाएं:-
निर्माण स्थल पर काम कर रहे मजदूरों के लिए प्राथमिक उपचार का इंतजाम होना चाहिए।जिससे की छोटी-मोटी चोंट आने पर मजदूर का तत्काल उपचार वही किया जा सके।इनकी सुरक्षा के लिए बेल्ट हेलमेट मास्क व दस्तानों की सुविधा होना चाहिए।समय-समय पर शिविर लगाकर मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाना अनिवार्य है जिससे मजदूर को अपनी शारीरीक स्थिति का पता चल सके।शिविर मे मजदूरों को अपनी शारीरीक स्थिति से अवगत कराकर उसे काम करने की समझाईश दी जाएं।उंची उंची ईमारतों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा के पुख्ते इंतजाम किए जाएं।यदि किसी कारणवश मजदूर उपर से गिरे तो वह किसी दुर्घटना का शिकार न हो।

जानकारी के अभाव मे नहीं मिलता हैं लाभ:-

क्षेत्र मे काम करने वाले हजारों मजदूर ऐसे है जिन्हें यह भी ज्ञान नहीं है कि शासन द्वारा उन्हें कितनी सेवाएं मुहैया कराई गई हैं।क्षेत्र मे हजारों मजदूर बिना पंजीयन के काम कर रहे हैं जिनकी सुध श्रम विभाग के अधिकारियों ने लेना उचित नहीं समझ रहे है।यदि इन सभी मजदूरों का पंजीयन श्रम विभाग के कार्यालय मे हो जाए तो इन्हें भी शासकीय सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।

कार्य स्थल पर होनी चाहिए सुविधाएं:-
निर्माण स्थल पर काम कर रहे मजदूरों के लिए प्राथमिक उपचार का इंतजाम होना चाहिए।जिससे की छोटी-मोटी चोंट आने पर मजदूर का तत्काल उपचार वही किया जा सके।इनकी सुरक्षा के लिए बेल्ट हेलमेट मास्क व दस्तानों की सुविधा होना चाहिए।समय-समय पर शिविर लगाकर मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाना अनिवार्य है जिससे मजदूर को अपनी शारीरीक स्थिति का पता चल सके।शिविर मे मजदूरों को अपनी शारीरीक स्थिति से अवगत कराकर उसे काम करने की समझाईश दी जाएं।उंची उंची ईमारतों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा के पुख्ते इंतजाम किए जाएं।यदि किसी कारणवश मजदूर उपर से गिरे तो वह किसी दुर्घटना का शिकार न हो।

इन सुविधाओं का मिलता है लाभ:-
मजदूरों के लिए शासन द्वारा अनेक कल्याणकारी योजनाएं बना रखी है जिनका लाभ केवल पंजीकृत मजदूरों को ही मिलता है।इनके अंतर्गत प्रसुति सहायता, विवाह, मृत्यु सहायता, चिकित्सा, शिक्षा प्रोत्साहन सहित अनेक सुविधाएं आती हैं।शासन द्वारा अनेक योजनाएं मजदूर कल्याण के लिए बनाई गई है।

[URIS id=12776]

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button

Adblock Detected

Allow me