FEATUREDभारतमध्यप्रदेश

Sidhi : बढ़ रहा आर्थिक बोझ: निजी स्कूलों की पढ़ाई पर भी उठने लगे सवाल

 

महंगे स्कूलों में दाखिले के बाद भी कोचिंग की दोहरी मार,अभिभावक परेशान

पोल खोल सीधी

जिला ही नहीं प्रदेश भर के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों को अपनी पढ़ाई पूरी करने कोचिंग संस्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है। लिहाजा अभिभावकों को स्कूलों की महंगी फीस तो पटानी ही पड़ रही है, कोचिंग का खर्च अलग से बढ़ने लगा है। ऐसे में निजी स्कूलों में बच्चों को दी जा रही शिक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जिले में एक सैकड़ा से अधिक निजी स्कूल हैं, जहां सीबीएसई और एपी बोर्ड पाठ्यक्रम में बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं। शहर में 90 फीसदी स्कूल सीबीएससी,एमपी बोर्ड पाठ्यक्रम के हैं। इन स्कूलों में हर महीने बच्चों की फीस के नाम पर मोटी रकम अभिभावकों से वसूला जा रहा है।

इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब बीस हजार होगी। इनमें से 90 फीसदी बच्चे स्कूल में पढ़ने के बाद दोबारा पढ़ने कोचिंग में जा रहे हैं, क्यों कि वे इन स्कूलों के भरोसे पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इस तरह इन स्कूलों में बच्चों को जो शिक्षा दी जा रही है उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इधर अभिभावकों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है।

हर साल 50 लाख का कारोबार:-

स्कूलों के बाद कोचिंग में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। कोचिंग संचालक साल भर में इन बच्चों के अभिभावकों से 50 लाख रुपए कमा रहे हैं। इसके विपरीत बच्चों के अभिभावक स्कूल में बच्चों की फीस के नाम पर हर साल 1 करोड़ रुपए के करीब फीस के रूप में भुगतान कर रहे हैं।

हर गली में कोचिंग और ट्यूशन क्लासेस:-

शहर में कोचिंग और ट्यूशन क्लासेस कुकुरमुत्ते क तहर बढ़ गए हैं। हर गली कूचे में कोचिंग क्लास का बोर्ड दिखाई देता है। इससे स्पष्ट है कि बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के नाम पर सिर्फ सरसरी ज्ञान ही दिए जा रहे हैं या आधी अधूरी पढ़ाई कराई जा रही है। पूरी पढ़ाई के लिए ट्यूशन और कोचिंग संस्थान खोले गए हैं।

सरकारी स्कूलों के बच्चे भी शामिल:-

जिले शासकीय स्कूल उत्कृष्ट विद्यालय व माडल एक्सीलेंस सहित अन्य स्कूल अंग्रेजी माध्यम मे स्कूल खोले हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चों में 90 फीसदी बच्चों के अभिभावक स्कूल में दी जाने वाली शिक्षा के बजाए ट्यूशन और कोचिंग में दी जाने वाली पढ़ाई पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। यही कारण है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक भी अपने बच्चों को कोचिंग भेजने से नहीं चूक रहे हैं।

इसके लिए अभिभावक स्वयं जिम्मेदार:-

स्कूल की पढ़ाई हल्की नहीं हो रही। कहीं न कहीं अभिभावक अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। बच्चों को स्कूल से आने के बाद नियमित रूप से एक घंटे होमवर्क और पढ़ाई करने के लिए उन्हें मोटीवेशन करना अभिभावकों का काम है। अभिभावक ही बच्चों को सेल्फ स्टडी की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं और उन्हें ऐसा करना चाहए। कोचिंग और ट्यूशन जाने की समस्या देश व्यापी है। कई मामले ऐसे भी हैं जिनमें बच्चे कहीं भी और कितनी भी कोचिंग क्यों न कर ले, उनके अंक सेल्फ स्टडी वाले बच्चों से कम ही रहते हैं।

स्कूल से भी सलाह, खुद क्लास टीचर पढ़ा रहे ट्यूशन:-

शहर के अधिकांश निजी स्कूलों के शिक्षक बच्चों और उनके अभिभावकों से बच्चों को ट्यूशन और कोचिंग संस्थान में पढ़ाने के लिए भेजने की सलाह दे रहे है। इतना ही नहीं स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक ही अपने घरों में ट्यूशन क्लास खोल रखे हैं। जहां खुद की कक्षाओं के बच्चों को स्कूल के बाद दोबारा घर में पढ़ाने के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूल की जा रही है।

[URIS id=12776]

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button

Adblock Detected

Allow me