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Sidhi : खेतो फसलो पर जम जाती हैं क्रेशर प्लांट से उड़ती धूल

 

जैव विविधता और पर्यावरण को भी खतरा,गाइडलाइन को दरकिनार कर धड़ल्ले से चल रहा अवैध खनन

पोल खोल सीधी

अवैध खनन न केवल शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि इससे जिले की जैव विविधता और पर्यावरणीय अवस्था भी प्रभावित हो रही हैं।शहर सटे पठारों पर सैकड़ो पेड़ झाड़ियां काट दी गई है।पठारों का दायरा भी सुकड़ा है।वही खदानों मे लगे क्रेशर प्लांट की धूल आसपास के खेतो मे परत की तरह बिछने से इनका उत्पादन भी गिर रहा है।तो वह धूल धुएं के गुबार और मशीनों की तेज आवाज इन पठारों पर बसने वाले पक्षियों के पलायन की भी वजह बन गई हैं।पहले इन पठारो पर मोर से लेकर अन्य प्रजातियों के पक्षी पाए जाते है जो अब यहां से गायब हो चुके है।

बड़ागांव हरदी,बहेरा,मयापुर,अमहवा,कुबरी सहित जिले के अन्य हिस्सों मे लगी क्रेशर खदानों के मिट्टी की खुदाई का सबसे ज्यादा नुकसान जिले के किसानों को हुआ है।खदानों से खेती लगातार प्रभावित हो रही हैं।क्रेशर खदानों मे पत्थर से गिट्टी बनाते समय मशीन से धूल धुंआ के गुबार उठते हैं जो कि आसपास के खेतो पर परत की तरह बिछ जाते है।फसलों की बोवनी के सीजन मे इस धूल की परत के कारण फसलों का अंकुरण उनकी बढ़वार थम जाती हैं।इससे कर्ई स्थानो पर किसानों के खेतो का रास्ता खत्म हो गया है तो कर्ई जगह खेत ही तालाब मे बदल गए है।

उजाड़ दिए परिंदों के आशियाने:-

क्रेशर खदानों ने जिले के पठारो को खोखला कर दिया है।इससे राजस्व की क्षति के अलावा पक्षियों का भी नुकसान हुआ है।पक्षी जिस वृक्षों झाडियों मे अपना आशियाना बनाते हैं पठारो की खुदाई के दौरान वे उजाड़ दिए गए जिससे पक्षी नए ठिकानों की तलाश मे पलायन कर गए।जिन पक्षियों ने आसपास के वृक्षों पर ठिकाना बनाया वे अब मशीनों के शोर और क्रेशर प्लांट से उड़ती धूल के कारण या तो घोंसला छोड़ गए अथवा बीमार होकर मारे गए।इन पठारो से सियार,सर्पों की संख्या भी तेजी के साथ घटी है जो जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा है।

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