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Sidhi : अफसरशाही हावीः 18 साल बाद भी सूचना के अधिकार का आमजन को लाभ नहीं

 

सूचना नहीं देनी पड़े इसलिए तरह- तरह के बहाने बना रहे जिमेदार अफसर

पोल खोल सीधी

सूचना का अधिकार अधिनियम को लागू हुए 18 साल बीत गए,लेकिन अफसरशाही हावी होने से आमजन के लिए यह अधिकार आज भी दूर की कोढ़ी ही बना हुआ है।हालात यह है कि 18 साल बाद भी आमजन को अधिकांश सरकारी कार्यालयों से वांछित सूचनाएं समय पर नहीं मिल पा रही हैं।कर्ई कार्यालयों मे तो इस अधिनियम के तहत आमजन से आवेदन ही नहीं लिए जाते।यदि जैसे तैसे आवेदन ले भी लेते है तो उन्हें सूचना देने की बजाय बाहर से ही टरका दिया जाता हैं या फिर आधी अधूरी सूचनाएं दी जाती हैं।

कर्ई कार्यालयों मे आवेदन लेने के बाद सूचना नहीं देनी पड़े इसलिए अधिकारी तरह तरह के बहाने बनाकर टरकाते नजर आते है।यहां तक कि सूचना अधिकारी का काम देखने वाले अधिकारी-कर्मचारी आरटीआई आवेदकों से मिलने तक से कतराते हैं।सीधी जिले के ही मुख्यालय मे कर्ई कार्यालयों मे तो आवेदन देने के लिए भी आवेदकों को कर्ई चक्कर काटने पड़ जाते है।ऐसे मे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य तहसील कार्यालयों मे क्या हाल होगा।प्रशासन की जनता के प्रति जवाबदेही बनाने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम लागू किया था।लेकिन सरकारी स्तर पर खामियां होने के कारण आज भी अधिनियम आमजन की पहुंच से दूर है।सरकार को इसे और प्रभावी बनाने की दिशा मे ठोस कदम उठाने चाहिए।ताकी विकास के कामकाज मे पारदर्शिता आ सके और आमजन को अधिकार मिल सके।

पता नहीं सूचना अधिकारी टरकाने के बहाने:-

अधिनियम के तहत सभी सरकारी कार्यालयों मे सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना बोर्ड पर जानकारी लिखवाना आवश्यक है लेकिन अधिकांश कार्यालयों मे अधिनियम की जानकारी तक नहीं है।ऐसे मे जानकारी चाहने वालो को पता ही नहीं चल पाता कि कार्यालय मे कौन सूचना अधिकारी है और आवेदन कैसे करना है।सीधी जिले मे चंद कार्यालयों मे सूचना वोर्ड लगे हैं।जबकि नगर पालिका,चिकित्सा, परिवहन,पीएचई,शिक्षा विभाग सहित अधिकांश कार्यालयों मे अधिनियम की जानकारी के बोर्ड नहीं है।कलेक्ट्रेट कार्यालय मे आमजन की आवाजाही दिनभर होती हैं,जबकि अधिनियम की जानकारी कक्ष मे दीवार पर लिखा रहना चाहिए।जहां लोगों का काम की जानकारी मिल सके।

18 साल बीते,कहां मिला अधिकार:-

देश मे 12 अक्टूबर 2005 को सूचना अधिकार अधिनियम लागू हुआ था।मंगलवार को अधिनियम को पूरे 18 साल हो गए। इस अधिनियम का उद्देश्य था कि सरकारी कामकाज मे पारदर्शिता आए और प्रत्येक आम नागरिक को उसके क्षेत्र मे हो रहे विकास कार्यों की पूरी जानकारी मिल सके।जबकि हकीकत यह है कि अधिनियम को 18 साल पूरे होने के बाद भी अधिनियम की पूरी तरह से पालना नहीं हो रही।कही जानकारी के अभाव मे तो कहीं अफरशाही के चलते आमजन को पूरी तरह से सूचनाएं नहीं मिल पा रही।

दो माह बाद भी नहीं दी सूचना:-

नगर पालिका सीधी मे मिनी स्मार्ट सिटी के तहत के कार्यों की जानकारी मागी थी लेकिन नपा के जिम्मेदार अधिकारी जानकारी देने के बहाने टाल मटोल करते नजर आ रहे है।जानकारी लेने जाने पर तारीख पर तारीख देते नजर आ रहे है।आज दिन तक नपा के जिम्मेदार जानकारी देने मे कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं।

चार आवेदन लगाए,एक की भी नहीं मिली जानकारी:-

शिक्षा विभाग के कार्यालय में लगाई गई सूचना अधिकार के जानकारी देने मे शिक्षा विभाग अधिकारी बेशर्म हो चुके है।शिक्षा विभाग कर्ई बिंदुओं को लेकर जानकारी चाही गई थी किंतु आज तक शिक्षा विभाग के अधिकारी जानकारी देने मे असमर्थ हो चुके हैं।सूचना के अधिकार मे चाही गई जानकारी को लगाने वाले व्यक्ति के पैरों की चप्पल तक घिस गई, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी जानकारी देने के बजाय के पूछते हैं कि ये जानकारी आपको को कौन बताया है।आप किसी के कहने पर तो नहीं लगाए हैं।

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