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Sidhi : खनिज विभाग में सीएम हेल्पलाइन का नहीं होता निराकरण, लटकाई जाती हैं शिकायतें

 

सूचना के अधिकार के तहत नहीं दी जाती जानकारी

खनिज विभाग के अडिय़ल रवैए से बनी परेशानी

पोल खोल सीधी

जिला खनिज विभाग सीएम हेल्पलाइन में दर्ज होने वाली शिकायतों के निराकरण को लेकर पूरी तरह से स्वेच्छाचारी बना हुआ है। विभाग से संबंधित जो भी मनमानी बनी हुई है उसका निराकरण जब विभागीय अधिकारियों द्वारा शिकायत के बाद भी नहीं किया जाता तो लोगों को कार्यवाही सुनिश्चित कराने के लिए सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने की मजबूरी बन जाती है। स्थिति यह है कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों के दर्ज होने के बाद भी अधिकारी उनका समयसीमा में निराकरण करने की जरूरत नहीं समझते। इसी वजह से शिकायतें अनावश्यक रूप से लटकती रहती हैं।

सीएम हेल्पलाइन में विभाग से संबंधित 10 शिकायतें लंबित हैं। इनमें कई शिकायतें खनिज सम्पदा के अवैध दोहन को लेकर काफी गंभीर हैं। फिर भी विभागीय अधिकारी अपनी मनमानी पर पर्दा डालने के लिए शिकायतों का निराकरण कराने की वजाय शिकायतकर्ता पर अनावश्यक रूप से शिकायत को बंद कराने के लिए दवाब डाला जाता है। यदि शिकायतकर्ता कार्यवाही न होने को लेकर असंतुष्ट रहता है तो उसकी शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में लटकी हुई रहती है। खनिज विभाग में दर्ज शिकायतों पर नजर डाली जाय तो एल-1 में 6, एल-2 में 1, एल-3 में 3 शिकायतें विगत दिनों लंबित थीं।

जानकारों का कहना है कि खनिज विभाग से संबंधित काफी शिकायतें बनी हुई हैं, लेकिन लोग जानकारी के अभाव में उसको पुलिस से जोड़कर देखते हैं। जिनके द्वारा स्पष्ट सम्पदा का अवैध दोहन करने की होड़ मची हुई है। इसके लिए वैध एवं अवैध दोनों तरीके अपनाए जा रहे हैं। खदान के संचालन के लिए जहां से अनुज्ञप्ति हासिल की जाती है उसके वजाय अन्य क्षेत्रों से अवैध रूप से खनिज सम्पदा का दोहन किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के पास अवैध खदान संचालन का निरीक्षण करने के लिए समय नहीं है। स्थिति यह है कि खनिज अधिकारी स्वयं नियमित रूप से कार्यालय में नहीं बैठती।

उनके द्वारा अघोषित रूप से अपना कार्यालय सतना में बनाया गया है। सप्ताह में दो दिन ही उनकी उपस्थिति कार्यालय में कुछ घंटे के लिए रहती है। ऐसे में विभाग से संबंधित कार्यों का संचालन खनिज निरीक्षक द्वारा किया जाता है। खनिज निरीक्षक के इशारे पर ही विभागीय कार्य संचालित हो रहे हैं। खनिज विभाग को जिले में खनिज के हो रहे अवैध कारोबार को रोकने के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ कार्र्य करना चाहिए। जिससे अवैध रूप से खनिज सामग्री की निकासी न हो सके। देखा यह जाता है कि विभागीय अधिकारी कभी भी फील्ड पर नहीं जाते जिसका पूरा-पूरा फायदा खनिज माफिया भी उठाने में लगे हुए हैं। खनिज माफिया अवैध रूप से खनिज सामग्री का दोहन करके लाखों की कमाई हर महीने की जा रही है। विभागीय अधिकारियों की भूमिका पूरी तर हसे संदिग्ध बनी हुई है।

खनिज का हो रहा अवैध उत्खनन

जिले में खनिज सामग्री का बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन एवं परिवहन किया जा रहा है। जिले के अंदर ही सबसे ज्यादा खनिज सामग्री का अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। जानकारों के अनुसार जिले में सर्वाधिक पत्थर की अवैध खदानें संचालित हो रही हैं। इन्हे वैध बनाने के लिए अनुज्ञप्ति भी जारी की गई है। जिन्हे अनुज्ञप्ति मिली हुई है उनके द्वारा निर्धारित स्थान से अन्यंत्र खदानें संचालित करने की होड़ मची हुई है। पत्थर की ज्यादातर अवैध खदाने राजस्व एवं वन क्षेत्रों की भूमि में संचालित की जा रही है। संबंधित संविदाकार कार्यवाही से बचने के लिए निजी भूमि में पत्थर की खदान संचालित करने की अनुज्ञप्ति लिए हुए हैं। उसी की आड़ में वन क्षेत्रों एवं खाली राजस्व भूमि में पत्थर की अवैध खदानें संचालित की जा रही हैं। पत्थर निकालने के लिए कोई मापदंड का पालन नहीं हो रहा है। निर्धारित सीमा से ज्यादा गहराई तक पत्थर की निकासी की जा रही है। जिसके चलते हादसों की संभावना भी बनी रहती है। कुछ हादसे कभी-कभार अवैध खदानों के चलते हो भी रही हैं। जिस पर समुचित कार्यवाही करने की वजाय उन्हे दबा दिया जाता है। इसके अलावा मुरूम, रेत, संगमरमर, बाक्साइड की अवैध निकासी का कारोबार भी संचालित हो रहा है। संगमरमर पत्थरों की अवैध खदानें मझौली ब्लाक में संचालित हो रही हैं जहां निर्धारित अनुज्ञप्ति क्षेत्र के बाहर खदानों का संचालन किया जा रहा है। बाहरी संविदाकार होने के कारण खनिज विभाग के अधिकारियों को भी इसके एवज में काफी लाभ पहुंच रहा है। रेत का अवैध कारोबार भी काफी सुर्खियों में बना हुआ है।

अवैध उत्खनन को लेकर दर्ज हो रही शिकायतें

जिले में खनिज सामग्रियों के अवैध उत्खनन को लेकर ही सीएम हेल्पलाइन में सर्वाधिक शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें रेत के अवैध उत्खनन से संबंधित हैं। शिकायतकर्ताओं द्वारा रेत के अवैध उत्खनन को लेकर सीएम हेल्पलाइन में इस उम्मीद में शिकायत दर्ज कराई जाती है कि संभवत: उनकी शिकायत पर रेत के चल रहे अवैध कारोबार पर रोक लग जाएगी किन्तु खनिज विभाग के अधिकारियों द्वारा उक्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसका निराकरण करने के वजाय शिकायत को किसी तरह बंद कराने की कार्ययोजना शुरू कर दी जाती है।

पत्थरों एवं मुरूम के अवैध खदानों को लेकर भी सीएम हेल्पलाइन में कई शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। खनिज विभाग के अधिकारियों द्वारा अवैध खदानों को बंद कराने के वजाय शिकायत को बंद कराने के लिए अपनी सक्रियता प्रदर्शित की जाने लगती है। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का निराकरण समयसीमा में न होने के कारण शिकायतकर्ताओं को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायत से जो भी पक्ष प्रभावित होते हैं उनके द्वारा भी शिकायत को बंद कराने के लिए दवाब बनाया जाता है। यहां तक कि दबंगों द्वारा भी कई बार शिकायतकर्ता को धमकियां देना शुरू कर दिया जाता है। खनिज के अवैध कारोबार में अधिकांश दबंगों के ही शामिल होने के कारण खनिज विभाग के अधिकारी भी अपना निजी स्वार्थ साधते हुए उनको पूर्ण संरक्षण प्रदान करने में पीछे नहीं हैं। विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में ही खनिज सम्पदा का अवैध दोहन करने की जिले में होड़ मची हुई है।

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