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Sidhi : देर रात औचक निरीक्षण में जिला अस्पताल पहुंचे नवागत कलेक्टर

 

मरीजों एवं उनके परिजनों की सुनी समस्याएं

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जिले के नवागत कलेक्टर साकेत मालवीय ने बीते बुधवार को अपना पदभार ग्रहण करने के बाद विभागों का ताबड़तोड़ निरीक्षण भी शुरू कर दिया है। पदभार ग्रहण करने के बाद श्री मालवीय जिले की सामान्य जानकारियों से मुखातिब होकर बुधवार से ही अपना कामकाज शुरू कर दिये, उन्होंने कामकाज शुरू करते ही कलेक्ट्रेट के सभी शाखाओं का निरीक्षण किया तथा बैठक कर सभी विभाग प्रमुखों से विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने के दिए निर्देश

दिन भर के व्यस्ततम समय के बावजूद भी जिला कलेक्टर साकेत मालवीय ने बुधवार की देर रात जिला चिकित्सालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने जिला अस्पताल के अंदर ओपीडी, इमरजेंसी समेत आदि वार्डों व साफ-सफाई का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश जिला अस्पताल के सिविल सर्जन को दिए हैं। कलेक्टर श्री मालवीय ने वहां उपस्थित मरीजों एवं उनके परिजनों से सहज रूप से मिलकर उनकी समस्या सुनी तथा उनके निराकरण के निर्देश अस्पताल प्रबंधन को दिए।

निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल में सीएमएचओ डॉ. आईजे गुप्ता, सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह समेत अन्य डॉक्टर एवं स्वास्थ्य अमला उपस्थित रहा। कलेक्टर के अचानक जिला अस्पताल में देर रात में पहुंच जाने से स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। हालांकि नवागत कलेक्टर द्वारा दिन में कलेक्ट्रेट में संचालित विभिन्न विभागों के कार्यालयों का निरीक्षण करने के कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी औचक निरीक्षण को लेकर सतर्क थे। जिला अस्पताल के निरीक्षण के लिए केन्द्रीय टीम भी यहां इससे पूर्व डेरा जमाए हुए थी। इस वजह से जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं काफी बेहतर हालत में थी।

नवागत कलेक्टर साकेत मालवीय ने जो स्वास्थ्य व्यवस्थाएं जिला अस्पताल में अपने औचक निरीक्षण के दौरान देखी है उसे केन्द्रीय टीम के निरीक्षण को लेकर दुरूस्त किया गया था। केन्द्रीय टीम के जाने के बाद नवागत कलेक्टर के निरीक्षण को लेकर भी स्वास्थ्य अधिकारी पूरी तरह से एलर्ट मोड में थे। उनके द्वारा इसी वजह से स्वास्थ्य सुविधाओं को तात्कालिक रूप से बेहतर बनाया गया है। जिससे नवागत कलेक्टर को भी औचक निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल की हकीकत मालुम न हो। केन्द्रीय टीम के आने से पूर्व जिला अस्पताल में सबकुछ मनमानी चल रहा था। यहां पदस्थ डॉक्टरों एवं स्टाफ नर्सों की स्थिति ये है कि उनके द्वारा मनमानी तरीके से ड्यूटी की जा रही है। डॉक्टर तो अस्पताल में आने के बाद वार्ड का भ्रमण कर सुबह एवं शाम कुछ समय के अंदर ही निकल जाते हैं।

बाद में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं पाने के लिए भटकना पड़ता है। यदि किसी मरीज की हालत बिगड़ती है तो संबंधित डॉक्टर परिजनों के अनुनय विनती के बाद भी देखने के लिए नहीं जाते हैं। आपातकालीन ड्यूटी में मौजूद डॉक्टर द्वारा भी गंभीर मरीजों को उनके बेड पर जाकर देखने की जरूरत नहीं समझी जाती। महज ड्यूटी स्टाफ नर्स से फोन पर बात कर दवाएं चिट में लिख दी जाती हैं। इसी वजह से जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को समय पर आवश्यक उपचार सुविधा नहीं मिल पाती।

स्थिति ये है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए आने वाले गंभीर मरीजों को सीधे रीवा के लिए रेफर कर देते हैं। कई बार गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार सुविधा तक नहीं मिल पाती और उनकी रीवा पहुंचने से पूर्व ही रास्ते में मौत हो जाती है। नवागत कलेक्टर से लोगों को काफी उम्मीदें हैं।

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