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Sidhi : मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से होगी ष्ष्वनवासी लीलाओंष्ष् की प्रस्तुतियां

 

पोल खोल सीधी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की घोषणा के परिपालन में मध्यप्रदेश शासनए संस्कृति विभाग द्वारा तैयार रामकथा साहित्य में वणिर्त वनवासी चरितों पर आधारित ष्ष्वनवासी लीलाओंष्ष् क्रमशः भक्तिमती शबरी और निषादराज गुह्य की प्रस्तुतियां जिला प्रशासन के सहयोग से प्रदेश के 89 जनजातीय ब्लॉकों में होंगी। इसी क्रम में जिला प्रशासन.सीधी के सहयोग से दो दिवसीय वनवासी लीलाओं की प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। प्रस्तुतियों की श्रृंखला में बालक उत्कृष्ट विद्यालय परिसरए कुसमी ;सीधीद्ध में 16 नवंबर 2022 को विनोद मिश्रा एवं साथी रीवा द्वारा भक्तिमति शबरी की प्रस्तुति दी जायेगी। कायर्क्रम के दूसरे दिन 17 नवंबर 2022 को भारती सोनी सीधी द्वारा निषादराज गुह्य की प्रस्तुति दी जायेगी। इन दोनों ही प्रस्तुति का आलेख योगेश त्रिपाठी एवं संगीत संयोजन मिलिन्द त्रिवेदी द्वारा किया गया है। कायर्क्रम प्रतिदिन सायं 7 बजे से आयोजित किया जायेगा।

लीला की कथाएं.

वनवासी लीला नाट्य भक्तिमति शबरी कथा में बताया कि पिछले जन्म में माता शबरी एक रानी थींए जो भक्ति करना चाहती थीं लेकिन माता शबरी को राजा भक्ति करने से मना कर देते हैं। तब शबरी मां गंगा से अगले जन्म भक्ति करने की बात कहकर गंगा में डूब कर अपने प्राण त्याग देती हैं। अगले दृश्य में शबरी का दूसरा जन्म होता है और गंगा किनारे गिरि वन में बसे भील समुदाय को शबरी गंगा से मिलती हैं। भील समुदाय शबरी का लालन.पालन करते हैं और शबरी युवावस्था में आती हैं तो उनका विवाह करने का प्रयोजन किया जाता है लेकिन अपने विवाह में जानवरों की बलि देने का विरोध करते हुएए वे घर छोड़ कर घूमते हुए मतंग ऋषि के आश्रम में पहुंचती हैंए जहां ऋषि मतंग माता शबरी को दीक्षा देते हैं। आश्रम में कई कपि भी रहते हैं जो माता शबरी का अपमान करते हैं। अत्यधिक वृद्धावस्था होने के कारण मतंग ऋषि माता शबरी से कहते हैं कि इस जन्म में मुझे तो भगवान राम के दशर्न नहीं हुएए लेकिन तुम जरूर इंतजार करना भगवान जरूर दशर्न देंगे। लीला के अगले दृश्य में गिद्धराज मिलापए कबंद्धा सुर संवादए भगवान राम एवं माता शबरी मिलाप प्रसंग मंचित किए गए। भगवान राम एवं माता शबरी मिलाप प्रसंग में भगवान राम माता शबरी को नवधा भक्ति कथा सुनाते हैं और शबरी उन्हें माता सीता तक पहुंचने वाले मागर् के बारे में बताती हैं। लीला नाट्य के अगले दृश्य में शबरी समाधि ले लेती हैं।

वनवासी लीला नाट्य निषादराज गुह्य में बताया कि भगवान राम ने वन यात्रा में निषादराज से भेंट की। भगवान राम से निषाद अपने राज्य जाने के लिए कहते हैं लेकिन भगवान राम वनवास में 14 वषर् बिताने की बात कहकर राज्य जाने से मना कर देते हैं। आगे के दृश्य गंगा तट पर भगवान राम केवट से गंगा पार पहुंचाने का आग्रह करते हैं लेकिन केवट बिना पांव पखारे उन्हें नाव पर बैठाने से इंकार कर देता है। केवट की प्रेम वाणी सुनए आज्ञा पाकर गंगाजल से केवट पांव पखारते हैं। नदी पार उतारने पर केवट राम से उतराई लेने से इंकार कर देते हैं। कहते हैं कि हे प्रभु हम एक जात के हैं मैं गंगा पार कराता हूं और आप भवसागर से पार कराते हैं इसलिए उतरवाई नहीं लूंगा। लीला के अगले दृश्यों में भगवान राम चित्रकूट होते हुए पंचवटी पहुंचते हैं। सूत्रधार के माध्यम से कथा आगे बढ़ती है। रावण वध के बाद श्री राम अयोध्या लौटते हैं और उनका राज्याभिषेक होता है। लीला नाट्य में श्री राम और वनवासियों के परस्पर सम्बन्ध को उजागर किया गया।

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