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Sidhi : नामांतरण,वारिसाना के लिए दर-दर भटक रहे किसान,भूमि की रजिस्ट्री होने के बाद भी नही हो पा रहे नामांरण

 

पोल खोल सीधी

जिले में मुख्यमंत्री सेवा संकल्प शिविरों में आवेदन देने के बाद भी किसानों को नामांतरण एवं वारिसाना के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। जो लोग भूमि क्रय की रजिस्ट्री करा चुके हैं उनका भी नामांरण नहीं हो पा रहा है। अविवादित नामांतरण बंटवारा व वारिसाना करानें के लिए लोग तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं।

जिले की गोपद बनास एवं रामपुर नैकिन तहसील में खुलेआम नामांतरण व बंटवारा के नाम पर अवैध वसूली लिपिकों एवं दलालों के द्वारा की जा रही है। किसानों द्वारा बताया गया है कि अविवादित नामांतरण बंटवारा का आदेश करानें के लिए तहसील कार्यालय में पदस्थ लिपिकों द्वारा 5 हजार से 10 हजार की मांग की जाती है। यही नहीं मुख्यमंत्री सेवा संकल्प अभियान के तहत नामांतरण बंटवारा के लिए दिए गए आवेदनों की कोई सुनवाई नहीं की जाती। तहसील कार्यालय में पदस्थ लिपिकों की जेब गरम करनें के बाद यदि तहसीलदार के द्वारा आदेश कर दिया जाता है

तो पटवारी खसरे में नामांतरण दर्ज नहीं करते। ऑनलाईन खसरे में दर्ज करनें के लिए पटवारी के पास पासवर्ड रहता है। पटवारी को पैसा देने के बाद भी किसानों को भटकना पड़ रहा है। यहां एक दर्जन से ज्यादा दलाल सक्रिय हैं। जो कि किसानों से तहसीलदार के ना पर नामांतरण और बंटवारा के लिए अवैध वसूली करते हैं। यही हाल तहसील कार्यालय रामपुर नैकिन का भी है। जहां बिना पैसे का कोई काम नहीं होता। अविवादित नामांतरण एवं बंटवारा के प्रकरणों के निपटारे के लिए किसानों को सुविधा शुल्क देनी पड़ती है।

स्टे के नाम पर मही है लूट

गोपद बनास तहसील एवं रामपुर नैकिन में भूमि का स्टे देने व उसको समाप्त करनें के नाम पर खुलेआम लोगों से अवैध वसूली की जा रही है। एक पक्ष से सुविधा शुल्क लेकर स्टे दे दिया जाता है तो दूसरे पक्ष के इशारे पर स्टे समाप्त भी कर दिया जाता है। स्थिति ये है कि जो चाहे वो अपनी भूमि या अन्य की भूमि में 5 हजार सुविधा शुल्क देकर स्टे पा सकता है। तहसील रामपुर नैकिन में जिनके नाम पर कोई जमीन नहीं है उनके आवेदन के आधार पर नियम विरुद्ध तरीके से स्टे दे दिया जाता है। चाहे वह भूमि उस व्यक्ति आवेदककर्ता की हो या न हो। स्टे देने के पूर्व तहसीलदार द्वारा पटवारी का प्रतिवेदन नहीं मंगाया जाता। बिना पटवारी के प्रतिवेदन लिए ही भूमि पर स्टे दे दिया जाता है। जिसके चलते अपने स्वयं की भूमि पर निर्माण कार्य कराने वाले व्यक्ति को फालतू काम बंद कर तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

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