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Sidhi : कांग्रेस 27 साल पहले लागू कर चुकी है पेसा कानून, वोट के लिए आदिवासियों को भ्रमित कर रही है शिवराज सरकार- प्रदीप सिंह दीपू

 

पोल खोल सीधी

प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा प्रदेश में पेशा कानून लागू करने की घोषणा को कांग्रेस पार्टी ने आदिवासियों को भ्रमित करने वाला महज कागजी खेल करार दिया है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रदीप सिंह दीपू ने जारी प्रतिक्रिया में कहां है कि जिस पेशा कानून का ढिंढोरा पीटकर भाजपा प्रदेश के आदिवासियों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है वह कानून कांग्रेस पार्टी 27 साल पहले ही मध्य प्रदेश में लागू कर चुकी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस की सरकार पूर्व में ही दिलीप सिंह भूरिया कमेटी की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1995- 96 में ही प्रदेश में आदिवासियों के हित में पेशा कानून लागू कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि पिछले 18 साल से आदिवासियों का शोषण एवं अत्याचार करने वाली भाजपा चुनाव के समय आदिवासी वोट बैंक साधने के लिए नए सिरे से पैसा कानून का शिगूफा छोड़कर आदिवासियों को भ्रमित कर रही है। कांग्रेस नेता प्रदीप सिंह ने अपने बयान में कहा कि आज जिस पेशा कानून का ढिंढोरा पीटकर भाजपा आदिवासियों की शुभचिंतक बनने की नौटंकी कर रही है उस कानून के अधिकांश प्रावधान कांग्रेस पार्टी की सरकार तीन दशक पहले लागू कर चुकी है। कांग्रेस नेता ने बताया कि आदिवासियों की जमीनों के क्रय विक्रय पर भू राजस्व संहिता की धारा 165 (6) के तहत प्रतिबंध लगाने का नियम पहले ही प्रावधानित किया जा चुका है। यदि किसी आदिवासी की जमीन गलत इंटेंशन के आधार पर खरीदी बेची गई है

तो उसे भू राजस्व संहिता की धारा 170 के अंतर्गत वापस लेने का अधिकार कांग्रेस सरकार पूर्व में ही सुनिश्चित कर चुकी है। साहूकारी एक्ट के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में अनियमित साहूकारी को पूर्णत: प्रतिबंधित करने का महत्वपूर्ण कार्य कांग्रेश पार्टी पहले ही कर चुकीहै। कांग्रेसी नेता ने कहा कि एक्साइज एक्ट में स्थानीय परंपराओं के तहत किसी सीमा तक पारंपरिक तरीके से मदिरा उत्पादन को कानूनी अधिकार हमारी पूर्ववर्ती सरकारें दे चुकी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासियों के हित में अनेक महत्वपूर्ण कानून कांग्रेस पार्टी बहुत पहले लागू कर चुकी है। भाजपा सरकार द्वारा अपने आदिवासी विरोधी चेहरे पर नकाब डालने के लिए पूर्व से लागू पैसा को फिर से लागू करने की घोषणा पूर्ण: कागजी एवं आदिवासियों को भ्रमित करने का एक चुनावी हथकंडा है।

क्योंकि इसमें ग्राम समितियों को कोई भी कार्यपालिक अधिकार नहीं दिए गए हैं। कांग्रेस की पूर्व सरकारों ने लघु वनोपज पर आदिवासी जनजाति के लोगों का अधिकार स्वीकार करते हुए सहकारिता के माध्यम से वनोपज संघ के अंतर्गत लाभांश पर कानूनी अधिकार दिया था। कांग्रेस नेता प्रदीप सिंह ने कहा कि भाजपा की नीतियां ना केवल अल्पसंख्यक बल्कि दलित एवं आदिवासी विरोधी रही है। उसे आदिवासियों की चिंता कभी भी नहीं रही है। जब जब भाजपा सत्ता में आई है तब तब आदिवासी हरिजन एवं महिलाओं पर अत्याचार एवं उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं। आदिवासियों को भाजपा मात्र वोट बैंक के रूप में देखती है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पेशा कानून का कागजी खेल खेल कर आदिवासी वोट बैंक को साधने की नापाक कोशिश की गई है।

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