मध्यप्रदेश

जिले में शीतलहर और कोहरे का जोरदार प्रकोप जारी,चौथे दिन 4 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़का पारा।

जिले में शीतलहर और कोहरे का जोरदार प्रकोप जारी,चौथे दिन 4 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़का पारा,ठिठुरन भरी ठंडक ने लोगों की बढ़ाई मुसीबतें…

सीधी: जिले में नव वर्ष के आगाज के साथ ही शीतलहर एवं कोहरे का प्रकोप भी शुरू हो गया है। ठिठुरन भरी गलन ने लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी है। थर्मामीटर का पारा लगातार नीचे लुढ़क रहा है। आज बुधवार को थर्मामीटर का पारा 4 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। संभावना जताई जा रही है कि अभी और नीचे पारा लुढ़क सकता है। भीषण गलन भरी ठंडक एवं ठिठुरन के चलते लोग परेशान हैं। सभी लोग अपने-अपने स्तर से ठंड से बचनें के लिए व्यवस्थाएं बनानें में लगे हुए हैं। गरम कपड़ों से लोग लदे हुए नजर आ रहे हैं। दिन भर लोग धूप खिलने का इंतजार करते रहते हैं।

कई दिनों से ठीक से सूर्य दर्शन नहीं

जिलेभर में कोहरे और ठंड का प्रकोप कुछ इस कदर है कि बीते कई दिनों से जिले भर में ठीक तरीके से धूप नहीं खिल सकी है और ना ही सूर्य के दर्शन हो सके हैं। सूर्यदेव की किरणें दोपहर 12 बजे के बाद कुछ घंटे के लिए बादलों की ओट से आंखमिचौली करते हुए ओझल हो जाती हैं। ठिठुरन भरी गलन से बचनें के लिए सक्षम लोग जहां अंगीठी और अलाव का सहारा ले रहे हैं वहीं हीटर का उपयोग भी किया जा रहा है। कड़ाके की ठंडक बढऩे से मनुष्यों के साथ ही जीव-जंतु भी सांसत मेंं हैं। मनुष्य तो अपने बचाव के लिए उपाय कर रहे हैंं लेकिन जीव-जंतु सबसे ज्यादा परेशान हैं।

पाला को लेकर किसानों में चिंता

कड़ाके की ठंडक बढ़ते ही दलहनी एवं तिलहनी फसलों में पाला लगने की खतरा भी गंभीर रूप से निर्मित हो गया है। किसान अपनी फसलों को पाला से बचानें के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। कुछ किसान खेतो में पानी भर रहे हैं तो कुछ शाम ढ़लते ही फसलों के आसपास का तापमान बढ़ानें के लिए आग जलाकर धुंआ कर रहे हैं। जिससे फसलों को पाला न लग सके। काफी संख्या में किसानों द्वारा दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बोनी की गई है। उन्हें उम्मीद थी कि फसलों की अच्छी पैदावार मिलेगी किंतु नए वर्ष के आरंभ होते ही मौसम ने अचानक करवट बदली और शीतलहर का प्रकोप शुरू हो गया है।

सर्दी के साथ गलन का भी असर

वर्तमान में ठिठुरन भरी गलन पूरी तरह से सितम ढा रही है। इतनी ज्यादा गलन और फैली हुई है कि छोटे से लेकर बड़े बुजुर्ग तक परेशान हैं। मौसम में भारी गलन पैदा हो जानें से ठंड लगने का खतरा भी गंभीर रूप से निर्मित हो चुका है। काफी संख्या में लोग ठंड लगने से बीमार भी पड़ रहे हैं। अस्पतालों एवं क्लीनिकों में डॉक्टरों के पास ठंड लगने के मरीज काफी तेजी के साथ पहुंचने लगे हैं। सबसे ज्यादा समस्याएं शीतलहर और ठिठुरन भरी गलन से घर से बाहर निकलने वाले लोगों की है। आवश्यक एवं रोजमर्रा के कार्यों के सिलसिले में निकलने वाले लोग काफी सांसत में हैं। खुले आसमान के नीचे फुटपाथों पर व्यवसाय करने वाले छोटे व्यवसायी अपने स्तर से ठंड से बचनें का प्रयास कर रहे हैं। स्थिति ये है कि बाजारों में शाम ढ़लने के बाद भीड़भाड़ पूरी तरह से थम जाती है। लोग आवश्यक खरीददारी शाम से पहले ही कर रहे हैं। जिससे कड़ाके की ठंड से सुरक्षित रहते हुए घर पहुंच सकें।

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