मध्यप्रदेश

जनपद में सूचना अधिकार कानून बना मजाक जनसुनवाई में उठा मुद्दा,आप भी हो जाएंगे हैरान।

जनपद में सूचना अधिकार कानून बना मजाक जनसुनवाई में उठा मुद्दा।

संजय सिंह मझौली सीधी
जनपद पंचायत मझौली के सभागार में आयोजित खंड स्तरीय जनसुनवाई कार्यक्रम में जनपद कार्यालय मझौली में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत किए गए आवेदनों में निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध न कराने एवं अपील निराकरण न किए जाने के संबंध में लिखित रूप में शिकायत कर प्रमुखता से मुद्दा उठाया गया।

 

बताते चलें कि मंगलवार 10 जनवरी को जनसुनवाई के प्रभारी उपखंड अधिकारी मझौली एवं तहसीलदार मझौली के समक्ष सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार राजकुमार तिवारी एवं अपिल कुमार सिंह द्वारा प्रभारी जनसुनवाई के नाम लिखित शिकायत की गई साथ ही श्री तिवारी ने बताया गया कि जनपद पंचायत अंतर्गत कई रोजगार सहायक व सचिव पद के दुरुपयोग एवं ग्राम विकास की राशि का फर्जीवाड़ा कर गबन करने के दोषी पाए गए हैं जिस कारण उन्हें निलंबित किया गया और कई लोगों की सेवा समाप्त कर दी गई है जो न्यायालय के स्थगन आदेश पर लगातार कार्य कर रहे हैं जबकि स्थगन आदेश कुछ समय के लिए ही होता है जिसके संबंध पुष्ट समाचार प्रकाशित करने के लिए प्रमाणित जानकारी की जरूरत होती है जिसके लिए सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत लोक सूचना अधिकारी जनपद पंचायत मझौली के समक्ष विधि संगत प्रपत्रों के साथ आवेदन किया गया लेकिन उसका निराकरण निर्धारित समय अवधि में न किए जाने के कारण जनपद के अपीलीय अधिकारी जो मुख्य कार्यपालन अधिकारी हैं उनके समक्ष अपील की गई। अपीलीय अधिकारी द्वारा लोक सूचना अधिकारी को जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया बावजूद उस आदेश की अवमानना की गई और वांछित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तब आवेदक द्वारा फिर से अपीलीय अधिकारी के समक्ष लोक सूचना अधिकारी के खिलाफ सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 20(1)के तहत कार्रवाई करने का आवेदन दिया गया जिसमें संबंधित अधिकारी के खिलाफ शस्ति अधिरोपित की जा सकती है साथ ही अपराध पंजीबद्ध कराया जा सकता है बाजूद उसके उस पर भी क्रियान्वयन नहीं किया गया। वहीं अपिल सिंह के आवेदन में हवाला दिया गया कि आवेदन के निर्धारित समय बीत जाने के बाबजूद जानकारी नहीं उपलब्ध कराई गई जिसके संबंध में कई बार मुख्य कार्यपालन अधिकारी से भी आग्रह किया गया लेकिन उनके द्वारा कोई समाधान नहीं दिया गया या यूं कहा जाए कि जनपद कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम जैसे सशक्त कानून को मजाक बनाया गया है। वहीं दोनों आवेदनों पर उपखंड अधिकारी द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को शीघ्र वांछित जानकारी उपलब्ध कराने हेतु आदेशित किया गया है।

लोगों की माने तो जनपद कार्यालय एवं विभिन्न ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर जारी है जबकि शिकायत कर्ताओं के शिकायत पर न तो पारदर्शी जांच होती है और ना ही कार्रवाई हो पाती है क्योंकि उनके काले कारनामों का चिट्ठा भी छुपाने का प्रयास किया जा रहा है जिसको लेकर कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट कराया गया है एवं सूचना का अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन हो जिसके लिए त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है।

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