मध्यप्रदेश

खूंखार जंगली जानवरों के हिंसक हमले से ग्रामीणों में जबरदस्त जनाक्रोश,हिंसक घटनाओं के बाद टाइगर रिजर्व के अधिकारियों पर हमले,विस्थापन में हो रही देरी से लोगों ने उठाए सवाल ?

खूंखार जंगली जानवरों के हिंसक हमले से ग्रामीणों में जबरदस्त जनाक्रोश,हिंसक घटनाओं के बाद टाइगर रिजर्व के अधिकारियों पर हमले,विस्थापन में हो रही देरी से लोगों ने उठाए सवाल ?
सीधी : जिले के संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत जंगल के बीचों-बीच 3 दर्जन से ज्यादा बसे ग्रामों के ग्रामीणजनों में जंगली जानवरों के हिंसक आतंक से अपनी जान बचाने का संकट आ खड़ा हुआ है। यहां के लोग जान जोखिम में डालकर बाहर निकलते हैं फिर चाहे बाजार जाना हो या किसी तरह के कार्यों के चलते आना जाना पड़े।
ग्रामीणों द्वारा बताया गया है कि आए दिन खूंखार जंगली जानवर बाघ, तेंदुआ, जंगली सुअर और भालू जैसे हिंसक जानवर दिनदहाड़े लोगों पर हमला कर रहे हैं जिसमें कई ग्रामीणों की मौत भी होना अब आम बात हो चुकी है। संजय टाइगर रिजर्व के सटे गांवों में रहने वाले लोगों में इतना ज्यादा आक्रोश है कि जब कोई भी बड़ी घटना घटती है तो घटनास्थल पर आने वाले संजय टाइगर रिजर्व के अमले पर ग्रामीण हमला कर देते हैं।
उधर विस्थापन में हो रही देरी को लेकर लोगों में असंतोष और आक्रोश पनप रहा है क्योंकि उनका कहना है अगर शासन प्रशासन एवं वन विभाग को जंगली जानवर प्रिय है तो हमें उचित मुआवजा देकर विस्थापित कर दिया जाए अन्यथा जंगली जानवरों से लोगों की सुरक्षा स्थाई रूप से हो जिसका प्रबंध किया जाए और जब तक विस्थापित नहीं किया जाता है तब तक उन्हें मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण
ग्रामीणों की माने तो शासन द्वारा संजय टाइगर रिजर्व अंतर्गत आबाद ग्रामों को विस्थापित किए जाने की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है जिसका हवाला देकर यहां मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध कराना बंद कर दिया गया है जैसे कि सड़क आवास, बिजली,पानी एवं ग्रामीण विकास के लिए संचालित केंद्र इन पर रोक लगाई गई है जिससे यहां के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्रामीणों द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन को बार-बार समस्याओं से अवगत कराते हुए सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते रहे हैं लेकिन उनकी मांगों और समस्याओं पर समस्या मूलक विचार नहीं किया गया जिससे ग्रामीणों का कहना है कि यहां के ग्रामीणों का महत्त्व सिर्फ मतदान करने के लिए होता है बांकी उनके समस्या से किसी को सरोकार नहीं है।
करोड़ों के बन रहे भवनों पर भी सवाल
ग्रामीणों ने प्रशासन एवं निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल करते हुए कहा कि जब यहां के लोगों को डेढ़ लाख रुपए का आवास योजना यह कहकर बंद किया गया है कि यहां के लोगों का विस्थापन हो जाएगा तब करोड़ों रुपए की लागत से भवन क्यों बनाए जा रहे हैं ? बताते चलें कि ग्राम चिनगवाह, बस्तुआ एवं उमरिया में तीन-तीन करोड़ से ज्यादा के लागत के विद्यालय भवन स्वीकृत कराए गए हैं जिनका निर्माण कार्य शुरू हो गया है जबकि उक्त विद्यालयों में भरपूर भवन पूर्व से ही निर्मित हैं।
कागजों में हो रहा सरकारी संस्थाओं का संचालन
संतोष सिंह बघेल
विटखुरी,रघुवर साकेत चिनगवाह, राधेश्याम भुरतिया चिनगवाह ने बताया कि यहां चाहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो अथवा उप स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, आंगनवाड़ी एवं कृषि विभाग इन सभी विभागों की योजनाएं कागजों में चल रही है क्योंकि यहां सड़क न होने से न तो एंबुलेंस वाहन आ सकता है और ना ही विभाग के जांचकर्ता अधिकारी ही आ पाते हैं यही वजह है कि सभी संस्थाएं कागजों में संचालित है लेकिन उसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है।
कर्मचारियों की जान भी रहती है खतरे में
क्षेत्र में पदस्थ कर्मचारी चाहे नियमित जाएं अथवा कुछ दिनों के अंतराल से लेकिन जब भी जाते हैं तो बाइक से जाते हैं जिन्हें जंगली जानवरों से बराबर खतरा बना रहता है।
नहीं स्थापित हो रहे मोबाइल टावर
ग्रामीणों में इस बात पर भी आक्रोश जताया कि आज के संचार युग में मोबाइल टावर ना होने की वजह से लोग संचार व्यवस्था से भी कोसों दूर हैं कभी कभार  शहडोल जिला का टावर पकड़ लेता है उसी से काम चलाते हैं।
इनका कहना है
डेढ़ वर्ष पहले ग्रामीणों एवं जंगल विभाग के अधिकारियों की एक बैठक आयोजित की गई थी जिसमें विस्थापित होने वाले लोगों को सूचीबद्ध किया गया था जिसमें 3 सैकड़ा लोगों ने अपना हस्ताक्षर कर विस्थापन के लिए सहमति दी थी लेकिन आज तक इस दिशा में आगे की कार्रवाई ना होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मेरे द्वारा कई बार सांसद विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन से भी क्षेत्र के लोगों को हो रही समस्या एवं मूलभूत सुविधा के लिए चर्चा कर अवगत कराया गया है लेकिन अभी तक इस दिशा में  कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
गिरधारी बैगा 
सरपंच चिनगवाह
बाघ के फुटप्रिंट मिलने से फिर दहशत
संजय टाइगर रिजर्व के आर- 1311 बीट चमराडोल वन परिक्षेत्र मझौली में गस्ती के दौरान टाइगर के पगमार्क देखे गए जिसके चलते कल मंगलवार को आसपास के गांवों में संजय टाइगर रिजर्व द्वारा लोगों को अलर्ट रहने के लिए मुनादी करवाई गई। इस मुनादी के बाद फिर इस इलाके के ग्रामीणों में दहशत का आलम है।

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