मध्यप्रदेश

युवा दिवस पर रक्तदान के लिए सी.एम.एच.ओ. ने की अपील,संजय गांधी महाविद्यालय में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर 12 जनवरी को।

युवा दिवस पर रक्तदान के लिए सी.एम.एच.ओ. ने की अपील,संजय गांधी महाविद्यालय में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर 12 जनवरी को।

सीधी: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आई.जे. गुप्ता ने बताया कि स्वामी विवेकानंद जयंती 12 जनवरी को युवा दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस अवसर पर संजय गांधी महाविद्यालय में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। जैसा कि माना जाता है कि रक्तदान महादान है क्योंकि रक्तदान से लोगों को नई जिंदगी मिलती है और रक्तदाता के इस सराहनीय कार्य को हमेशा याद रखता है। रक्तदान से न तो शरीर में बीमारी आती है न शरीर कमजोर पड़ता है, और न ही एच.आई.व्ही. होने का खतरा होता है। रक्तदान करने से ह्नदयाघात होने की संभावनाऐं कम होती हैं, क्योंकि रक्तदान से खून का थक्का नहीं जमता, खून कुछ मात्रा में पतला हो जाता है। वजन कम करने में मदद मिलती है, शरीर में नये ब्लड सेल्स बनने के कारण तंदुरूस्ती आती है। लिवर से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है, आयरन की मात्रा संतुलित रहती है, कैंसर का खतरा कम रहता है, इसलिये जीवन रक्षा हेतु रक्तदान अवश्य करें। किसी की जिंदगी बचाकर हम एक नेक कार्य करते हैं।

सीएमएचओ डॉ गुप्ता ने कहा की हमारा उद्देश्य अधिक से अधिक स्वस्थ व्यक्तियों को स्वैच्छिक रक्तदाता बनाना और दूसरों को भी रक्तदान के लिये प्रोत्साहित करना है। रक्तदान मानव संतुष्टि है। रक्तदान से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिये- रक्तदाता का वजन 45 से 50 किलोग्राम से कम न हो, 18 वर्ष की आयु के बाद ही रक्तदान करें, रक्त देने से 24 घण्टे पहले से ही शराब, धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन न करें, स्वयं की मेडिकल जांच करा लें, सुनिश्चित करें कि आपको कोई बीमारी न हो, रक्तदान करने से पहले अच्छी नींद ले, तला हुआ खाना और आइसक्रीम न खायें।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ गुप्ता ने समस्त युवाओं – कर्मचारी, अधिकारी, मैदानी कार्यकर्ता, पुलिस कर्मी, छात्र-छात्राओं, आम जन, व्यापारी संगठन, समाज सेवी एवं नगरवासियों से अपील किया है कि जिला चिकित्सालय सीधी में स्थापित एक मात्र ब्लड बैंक से ही सभी जरूरतमंदों को रक्त की आपूर्ति कराई जाती है, इसलिए अधिक से अधिक संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान करने एवं कराने का कष्ट करें ताकि भविष्य में आपातकालीन परिस्थिति होने पर किसी भी मरीज को रक्त की अनुपलब्धता में मृत्यु के संकट से बचाया जा सके।

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