मध्यप्रदेश

बाघ से पीड़ित परिवार के घर पहुंचा प्रशासन,दिया 8 लाख की आर्थिक सहायता राशि,आदमखोर बाघ को रेस्क्यू कर भेजा गया बाहर।

बाघ से पीड़ित परिवार के घर पहुंचा प्रशासन,दिया 8 लाख की आर्थिक सहायता राशि,आदमखोर बाघ को रेस्क्यू कर भेजा गया बाहर।

संजय सिंह मझौली सीधी
थाना क्षेत्र मझौली अंतर्गत ग्राम बड़काडोल में गत 6 जनवरी शुक्रवार को गुड्डी बाई पति रामाधार भुर्तिया की बाघ के हमले से मौके पर ही मौत हो गई थी उसी शोक संतृप्त परिवार में शुक्रवार 13 जनवरी को शासन-प्रशासन जिनमें क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह टेकाम एवं प्रशासनिक अमला कलेक्टर साकेत मालवीय, एस पी मुकेश कुमार श्रीवास्तव,जिला मुख्य कार्य अधिकारी राहुल धोटे, एसडीएम मझौली सुरेश अग्रवाल, तहसीलदार वीके पटेल,मुख्य कार्यपालन अधिकारी मान सिंह सैयाम, एसडीओपी रोशनी सिंह ठाकुर, थाना प्रभारी दीपक सिंह बघेल,कुँवर बहादुर सिंह बाघेल,प्रवीण तिवारी मंडल अध्यक्ष, रामसखा शर्मा,मनोज सिंह बघेल विधायक प्रतिनिधि राजेश सिंह,उदयभान यादव नगर उपाध्यक्ष मझौली सहित काफी तादाद में भाजपा कार्यकर्ता व मैदानी कर्मचारी शामिल थे। पीड़ित परिवार को जहां विधायक द्वारा शोक संवेदना प्रकट कर ढाढस बंधाते हुए नगद राशि देने के साथ ही हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया गया वहीं ग्रामीणों को बताया गया है कि आदमखोर बाघ को चिन्हित कर उसे रेस्क्यू करा कर बाहर भिजवा दिया गया है। कलेक्टर द्वारा सूचित किया गया कि पीड़ित परिवार के मुखिया के बैंक खाता में 8 लाख रु सहायता राशि जारी कर दी गई है जिसका चेक पीड़ित के परिजनों को देते हुए खाता चेक कराने के लिए कहा गया।

मीडिया के सवालों पर कलेक्टर श्री मालवीय द्वारा कहा गया कि यह ग्राम सहित कई ग्राम है जो टाइगर रिजर्व के कोर जोन एवं बफर जोन के अंतर्गत आते हैं जिनमें बाघ सहित हिंसक जानवरों का खतरा ग्रामीणों के लिए बना रहता है जिसके बारे में दीर्घकालिक योजना बनाई जाएगी।अभी ग्रामीण सतर्कता बरतें अकेले जंगल में न जाएं और टाइगर रिजर्व के कर्मचारी भी बाघ और तेंदुए की लोकेशन ग्रामीणों को बताएंगे जिसके बारे में योजना बनाई जा रही है। पात्र लोग प्रमाणित ना होने के कारण योजना से वंचित है जिस सवाल पर कहा गया कि ऐसे लोगों के लिए यहां सिविर लगाई जाएगी और ऐसे लोगों का प्रमाण पत्र बनाया जाएगा ताकि उन्हें योजना का लाभ मिले जो शासन प्रशासन की प्राथमिकता में है।
ग्रामीणों ने कहा कि जंगली जानवरों के द्वारा फसल एवं फल सब्जी नष्ट कर दी जाती है जिसके संबंध में जंगल विभाग कहता है राजस्व विभाग में जाओ और राजस्व विभाग के अधिकारी कहते हैं जंगल विभाग से प्रमाणित कराओ इसके चलते लोगों को क्षतिपूर्ति का लाभ नहीं मिल पाता है जिसे भी गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर द्वारा भरोसा दिलाया गया कि ऐसे प्रकरण प्राथमिकता से और सरल तरीका से बनाए जाए ताकि किसानों को ज्यादा परेशानी ना हो और उन्हें क्षतिपूर्ति का लाभ आसानी से मिल सके।

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