मध्यप्रदेश

कसमें 7 जन्मों की खाये,रिश्ते साल भर नहीं चल पाये न मुकदमा न विवाद न बदनामी,अपासी सहमति से टूट रहे रिश्तों की नर्ई कहानी।

कसमें 7 जन्मों की खाये,रिश्ते साल भर नहीं चल पाये
न मुकदमा न विवाद न बदनामी,अपासी सहमति से टूट रहे रिश्तों की नर्ई कहानी।

ब्यूरो सीधी:- वो शादी के वक्त कसमें 7 जन्मों तक साथ जीने-मरने की खाते है।शादी के बाद रिश्ते कुछ यूं बिगड़ जाते है कि शादीशुदा जीवन एक साल के अंदर ही दम तोड़ता नजर आता है।अब तो न कोर्ट की चकल्लस चाहिए,न कचहरी की,न तलाक की,न विवाद की,न मुकदमेबाजी की कागजी कार्यवाही।अब सीधे आपसी सहमति से अलग होने की गुहार लगाई जा रही हैं।सीधी मे इस साल 2022 मे परिवार परामर्श केंद्र मे 35 मामले न्यायालय की सलाह मे ऐसे आए हैं जिसमे आपसी सहमति के आधार पर अलग होने का निर्णय लिया गया है।यह वो परिवार थे जिन्होंने अपनी शादी के 365 दिन भी पूरे नहीं किए और एक दूसरे से होने वाले विवादों और आपसी मतभेद के बाद अलग होने का निर्णय किया।विवाह अधिनियम के तहत इनका निराकरण किया गया। इस आपसी सहमति से अलग होते परिवारों का मान सम्मान भी बरकरार है,बदनामियों से भी निजात मिली है, इसलिए इस तरह नव दाम्पत्य जीवन टूट रहा है।वर्ष 2022-23 मे वन स्टॉप सेंटर मे जिले से कुल 340 प्रकरण प्राप्त हुए।जिसमें से कुल 214 प्रकरणों को परामर्श व मध्यस्थता के माध्यम से निराकरण किया गया है।कुल 22 मामलों मे आवेदिका को आश्रय और चिकित्सीय सहायता दिलाई गई हैं।37 प्रकरण मे न्यायालीन व विधिक सहायता देकर न्यायालय भेजा गया।

श्रमजीवी वर्ग के10प्रतिशत प्रकरण:-
आंकडों पर नजर दौडाएं तो पता चलता है कि इस साल जो मामले पहुंचे उन मे 10 प्रतिशत शिकायत ही श्रमजीवी वर्ग की निकली।अब पारिवारिक विवादों का चलन मध्यमवर्गीय और हाई प्रोफाइल परिवारों मे ज्यादा हो गया है।गरीबो का वह वर्ग जो दिन भर श्रम मे लगे हुए होते है वह विवादों मे बहुत कम ही पड़ते है।

बच्चों पर मां का गुस्सा पिटाई बनती हथियार:-
शादी के बाद पति-पत्नी मे जिन परिवारों मे अच्छे संबंध होते है,उन जगहों पर सास और बहू का विवाद बढ़ रहा है।बहु की सास से हुई बुराई और उसके बर्ताव का गुस्सा निकालने के लिए वह बच्चों पर सितम करती हैं।वह जिगर के प्यारे बच्चों को ही इतना पीट देती हैं कि घरों मे रुका हुआ विवाद फिर चालू हो जाता है।

18प्रतिशत मां-बाप को शादी का दोषी बता रहे:-
हर मां-बाप अपने बेटे व बेटी की शादी बड़े ही अरमानों के साथ करते है।वो खुद ही रिश्तों को तलाशते है।उनकी गंभीरता को समझते है,लेकिन अब इन्हीं मां-बाप को बच्चे शादी के बाद दोषी ठहराते हैं।इस साल 18प्रतिशत शिकायत कुछ इसी तरह की रही हैं।जिसमें कहा गया कि मां-बाप ने गलत जगह शादी कर दी।

सीसीटीवी से खुद की निगरानी:-
अब जो नया ट्रेंड चल रहा है वह तकनीकी दौर का।जिसमें सास ससुर के साथ पति भी अपनी सेफ्टी के लिए सीसीटीवी कैमरों का सहारा ले रहे हैं ताकि कभी कोई घटना दुर्घटना हो तो वह बच सके।देखने मे आया है कि कर्ई बार नवविवाहिता के आत्महत्या कर लेने पर पूरा का पूरा परिवार परेशान हो जाता है।इसलिए अब लोग सीसीटीवी कैमरा का उपयोग अपने घर की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी आत्मरक्षा के लिए भी कर रहे हैं।

मिल रहा महिलाओं को नया जीवन:-
वन स्टॉप सेंटर मे सर्वाधिक प्रकरण घरेलू हिंसा से प्रताडित महिलाओं के प्राप्त हुए है।सर्वप्रथम दोनो पक्षो को निरंतर परामर्श के माध्यम से कर्ई घर और परिवारों को बिखरने से बचाया जा रहा है।वन स्टॉप सेंटर मे कांउसलिंग कराकर गलत रास्ता चुन लिया या भटक गर्ई महिलाओं के प्रकरण को भी परामर्श के उपरांत पुनः परिवार व समाज मे पुर्न स्थापित कर नया जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़कर कौशल विकास व रोजगार से जुड़ने का बढ़ावा दिया जा रहा है।

181 की शिकायत का भी निराकरण करती हैं काउंसलर:-
महिला हेल्पलाइन 181 की शिकायत पर सभी जिले की वन स्टॉप सेंटर द्वारा निराकरण किया जा रहा है।अभी तक वन स्टॉप सेंटर मे कुल 604 प्रकरण 181 से प्राप्त हुई थी जिसमे 492 शिकायतो का वन स्टॉप सेंटर निराकरण किया गया।लंबित 112 शिकायतो मे कार्यवाही चल रही हैं।181 मे प्राप्त शिकायत मे वन स्टॉप सेंटर की केस वर्कर/काउंसलर वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देश मे पीड़िता की समस्यानुसार संबंधित विभाग से संपर्क कर उन प्रकरणों का निराकरण करती हैं।वन स्टॉप सेंटर की अनुभवी कांउसलर आवश्यकता पड़ने पर टेली कांउसलिंग भी करती हैं यदि प्रताडित महिला संबंधित थाने या वन स्टॉप सेंटर आने मे या पहुंच पाने मे सक्षम नहीं होती हैं तो वीडियो कांफ्रेंसिंग या कांफ्रेंस कॉल करके उनकी काउंसलिंग करती है।दोनो पक्षों के आपसी विवाद पर टेली कांउसलिंग द्वारा उचित परामर्श देकर उनकी समस्याओं को सुलझाया जाता हैं।

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