मध्यप्रदेश

कर्मचारियों की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे नौनिहाल बच्चे एवं बच्चियां जांच के नाम पर की जाती है खाना पूर्ति….

कर्मचारियों की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे नौनिहाल बच्चे एवं बच्चियां जांच के नाम पर की जाती है खाना पूर्ति….

पोल खोल पोस्ट
राजबहोर केवट

सीधी सिंहावल। मध्य प्रदेश के सीधी जिले का सिहावल विधानसभा जो किसी ना किसी मामले को लेकर हमेशा सुर्खियों में बना ही रहता है।

जी हां हम बात कर रहे हैं सिहावल विधानसभा क्षेत्र की जहां प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने मध्यान भोजन व्यवस्थित रूप से स्कूली बच्चों को मिलें इसके लिए मापदंड तय किया है। परंतु जिले के अधिकांश अधिकारी,कर्मचारी विद्यालयों का निरीक्षण करने से परहेज करते हैं। और सब कुछ मैदानी कलस्टर स्तर पर तै कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।

सूत्रों की माने तो यहीं से उगाही बगाही का खेल शुरू हो जाता है। कथित स्व सहायता समूह जो खरे नहीं उतरते उन्हें पृथक कर दिया जाता है। समूह संचालकों की सांठगांठ विद्यालय एवं आंगनवाड़ियों में पदस्थ कर्मचारियों के द्वारा संपूर्ण पत्रक जारी कर दिया जाता है। और सब समूह संचालक मनचाहे भुगतान उठा रहे है।

सिहावल विधानसभा क्षेत्र के किसी भी विद्यालय में शासन के नियमानुसार नहीं मिलता मध्यान भोजन

आपकों बताते चलें कि सिंहावल विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जितने भी विद्यालयों में समूह संचालकों के द्वारा मध्यान भोजन देने का टेन्डर लिया गया है। जहां एक भी विद्यालय प्राथमिक हो या मिडिल या फिर आंगनवाड़ी केंद्र कहीं भी शासन के बनाई गई गाइड लाइन एवं मीनू के आधार पर नहीं दिया जा रहा मध्यान भोजन समूह संचालकों के द्वारा नौनिहाल बच्चों के पेंट में डाला जा रहा है डाका जिम्मेदार बेखबर मुख्यालय परिसर की समीप की विद्यालयों का भी नहीं हो पाता निरीक्षण आखिर क्यों ?… वज़ह क्या है। मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारियों पर यह सवालिया निशान बना हुआ है।

बड़े बड़े नेताओं एवं कर्मचारियों के परिवार के भी समूह संचालित है

मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा जांच पड़ताल एवं निरीक्षण करने की मजाल क्या कि हिम्मत जुटा सके अधिकारी कर्मचारी।

साथ ही बड़े-बड़े नेताओं एवं कर्मचारियों के परिवारों के द्वारा संचालित समूह की वजह से उनके हाथ भी जांच के नाम से इतरा जातें हैं। और राजनीतिक पकड़ जकड़ की वज़ह से उनके हाथ की कलम सच का फ़ैसला करनें पर परहेज कर जातें हैं। इसी उदासीनता की वजह से बच्चों के मध्यान भोजन पर धड़ल्ले से डाका डाल रहें हैं समूह संचालक।

रसोईघर पहुंचने से पहले मध्यान भोजन का चांवल पहुंच रहा व्यापारियों के घर

शासकीय उचित मूल्य दुकान से विद्यालयों के कक्ष में पहुंचने से पहले मध्यान भोजन का चावल समूह संचालकों के द्वारा व्यापारियों के घर तक पहुंचाया जा रहा है। और उसके एवज में व्यापारियों से मोटी रकम ली जा रही है। छात्र-छात्राओं एवं छोटे नौनिहाल बच्चों के लिएं मात्र दाल चावल मध्यान भोजन के नाम पर दिया जा रहा है। निरीक्षण के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा की कितना गुणवत्तापूर्ण समूह संचालकों के द्वारा विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को भोजन कराने की व्यवस्था की जा रही है। परंतु पूरे सिहावल विधानसभा क्षेत्र में संचालित समूहों की व्यवस्था वेंटीलेटर पर हैं। जांच के नाम से अधिकारी कर्मचारियों का छूटता है पसीना।

देखना दिलचस्प होगा कि खबर प्रकाशन के बाद क्या अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा किसी भी संचालित समूह का निरीक्षण हो पाता है या नहीं या फिर पहले जैसे प्रारंभ रहेंगी खानापूर्ति नेस्ट अपडेट के लिए बने रहे हमारे साथ।

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