मध्यप्रदेश

ग्राम सुपेला में श्रीमद् भागवत कथा,द्वितीय दिवस,भागवत भगवान के प्रभाव की कथा नहीं,स्वभाव की कथा है : देवी चित्रलेखा।

ग्राम सुपेला में श्रीमद् भागवत कथा,द्वितीय दिवस,भागवत भगवान के प्रभाव की कथा नहीं,स्वभाव की कथा है : देवी चित्रलेखा।

सीधी जिले के सुपेला गांव में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक देवी चित्रलेखा ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण मात्र से पाप से मुक्ति मिलती। भागवत भगवान के प्रभाव की कथा नहीं,स्वभाव की कथा है। जिसमें भगवान कैसे हैं ,उनका स्वभाव क्या है इसका उत्तर भागवत कथा में मिलता है।
उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर कथा होती है वहां भगवान विराजमान होते हैं। भगवन नाम के जाप से सारी विपत्ति का नाश हो जाता हैं। इस जगत में भगवत कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं है।
उन्होंने आगे कहा की भागवत जी के श्लोक एवं अक्षर किसी खजाने से कम नहीं है,भारत की सबसे बड़ी धरोहर धर्मग्रंथ,वेद एवं वेद वाणी। भागवत पुराण में 12 स्कंध है, जो अद्भुत और जीवन को ऊंचा उठाने वाले हैं।

क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भागवत कथा में श्रोता गण भक्तिभाव से झूम उठे।

कथा व्यास ने आगे बताया कि मनुष्य को समाज में अच्छे काम करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है की कर्म ही प्रधान है, बिना कर्म कुछ संभव नहीं होता है, जो मनुष्य अच्छा कार्य व सत्कर्म करता है उसे अच्छा फल मिलता है व बुरे कर्म करने वाले को हमेशा बुरा फल मिलता है। मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।

कथावाचक देवी चित्रलेखा जी ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है।
भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है।

इसलिए सभी को अच्छे कर्मो के प्रति आकृष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक मार्ग दमन का है तो दूसरा उदारीकरण का। दोनों ही मार्गो में अधोगामी वृत्तियां निषेध हैं। जैसे कि गोकर्ण ने कथा कही, किन्तु उसके दुराचारी भाई धुंधकारी ने मनोयोग से उसे सुना तो मोक्ष प्राप्त हो गया। भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाए आत्मा तृप्ति नहीं होती है। भागवत कथा सुनते ही भक्ति,ज्ञान और वैराग्य जाग जाता है।
उन्होंने बताया कि भगवान पर भरोसा ही भक्ति का संकेत है, मीरा ने श्री कृष्ण पर भरोसा करके जहर पी लिया था। देव कृपा से जहर उनका कुछ भी नहीं बिगाड़ सका। ऐसी ही सच्ची भक्ति का आश्रय हम सभी को जीवन में लेना चाहिए।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि गण, सामाजिक कार्यकर्ता सहित उपस्थित श्रोताओं ने संगीत मय कथा का आनंद लिया।

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