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Sonebhadra: लोकनिर्माण विभाग शासनादेश के इतर जाकर टेंडर प्रक्रिया को अपने चहेतों के पक्ष में करने के लिए हर जतन करने पर आमादा

 

लोकनिर्माण विभाग में चला आ रहा है रवैया एक कहावत सुना होगा कि तू डाल डाल,हम पात पात

पोल खोल सोनभद्र

(दिनेश पाण्डेय)

जिला खनिज न्यास मद से कराए जाने वाले कार्यो को कराए जाने के लिए निकली गयी निविदाओं में व्यापक पैमाने पर नियमों को तोड़ मरोड़ कर उनका बंदर बाट किया जा रहा है। इसी मद से होने वाले कार्यों में खेल खेला जा रहा है। यहां आपको बताते चले कि डीएमएफ से कराये जाने वाले कार्यों की निकली गयी निविदाओं में से अधिकांश की अंतिम तिथि दिनांक 22 अक्टूबर 2022 दोपहर 12 बजे तक ही निर्धारित किया गया था। टेंडर मैनेज करने के लिए दिन रात बैठक एवं रणनीति बनाई जा रही थी।

पर निर्धारित तिथि तक टेंडर मैच सही से फ़िक्स न होने के कारण ही सम्भवतः टेंडर की तिथि अचानक बढ़ा दी गई और टेंडर की शर्तों में भी मनमाफिक परिवर्तन कराए गए और महामंडलेश्वर ने रेफ़री की भूमिका में मैदान में मोर्चा संभाला।जब मीडिया ने खबर को खंगाला तो सुर्खियां बनने लगी तो एक बार फिर से निविदाओं की तिथियों को बढ़ा दिया गया। अधीक्षण अभियंता मिर्जापुर वृत लोक निर्माण विभाग को दिनांक 21अक्टूबर 2022 को एक शुद्धि पत्र जारी करना पड़ा।

जिसमें सूचित करना पड़ा कि अपरिहार्य कारणों से आमंत्रित निविदाओं की तिथि 31अक्टूबर तक बढ़ाई जाती है फिर इसे 5 नवम्बर तक बढ़ा दिया गया। इसमें भी विभाग अपना खुराफ़ाती दिमाग़ लगाने से बाज़ नहीं आया। सूत्रों की माने तो धरोहर धनराशि जो पहले दो प्रतिशत के करीब थी। उसे बढ़ाकर अचानक से तक़रीबन पांच प्रतिशत के करीब पहुंचा दिया गया।

यह सब किस कारण किया गया। इस रहस्य को सब पंजीकृत विभागीय ठेकेदार जानते हैं। परन्तु सच बोलने से हार्ट अटैक एवं ब्रेन हेमरेज की सम्भावना बढ़ जाती है। इसीलिए सभी महानुभाव बाबा भंडारी बने हुए हैं। यदि विभाग पर पैनी नजर रखने वाले लोगों की मानें तो यह सारा खेल कमीशनखोरी एवं पसंदीदा फर्मों को टेंडर देने के लिए ही खेला जा रहा है।आख़िर नियम कानून भी कुछ होता है। या फिर जब चाहा एक तुग़लकी फरमान से सब कुछ बदल दिया।

विभाग की अंधेरगर्दी उस वक़्त अपने चर्मोत्कर्ष पर पहुंच गई जब निविदाओं के कुछ कार्यों को ही आधा अधूरा ही विभागीय साइट पर अपलोड कर दिया गया।यहाँ आपको बताते चलें कि बाकायदा शासनादेश जारी कर स्वीकृति की प्रत्याशा में टेंडर निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार के शासनादेश लागू नहीं होते वरना करोड़ो के टेंडर स्वीकृति की प्रत्याशा में न निकाले जाते।विभाग के कुछ पंजीकृत ठेकेदारों ने बताया कि चार ऐसे कार्य साइट पर अपलोड है जिसके स्टीमेट रेट को दर्शाया ही नहीं गया। इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मदारों को नियमानुसार कठोर दंड देना चाहिए। इतनी बड़ी गलती विभाग आख़िर कैसे कर सकता है। इस हरक़त से स्पष्ट प्रतीत होता है कि विभाग को कमीशन और टेंडर मैनेज के अलावा कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है। 22 अक्टूबर निविदा की अंतिम तिथि की बात की जाये तो 12 बजे दोपहर तक के निर्धारित समय के बाद भी एक टेंडर क्रॉस कर तीन बजे तक खुला रहा। ताकि आसानी से समझकर ठेकेदार टेंडर रेट डाल सकें। तक़रीबन 35 करोड़ के चार टेंडरों में ही आखिर क्यों बिल ऑफ़ क्वांटिटी में रेट नहीं भरा आखिर क्यों।

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