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Sonebhadra: डिफॉल्टर अधीक्षण अभियंता ने सोनभद्र में पुनः टेंडर प्रक्रिया में किया सेंधमारी

 

पीडब्ल्यूडी में टेंडर प्रक्रिया में हुई घपले बाजी आखिर अपने आदत से बाज नही आ रहे हैं अधीक्षण अभियंता

पोल खोल सोनभद्र

(दिनेश पाण्डेय)

200 करोड़ से अधिक का डीएमएफ मद से कराये जाने वाले कार्यों में अभी भी खेल खेला जा रहा है। यह सबकुछ दागी अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार द्विवेदी के करकमलों से किया जा रहा है। ठीक वैसा ही खेल एके द्विवेदी सोनभद्र में खेल रहे हैं। जैसा खेल उन्होंने कौशाम्बी जनपद में खेला था। लगता है योगी सरकार के पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया में सेंधमारी की वह कसम खा चुके हैं। पहले 22 तारीख को दुपहर 12 बजे तक टेंडर खुलने थे। जब टेंडर मैनेज के खेल पर से मीडिया ने पर्दा उठाया तो टेंडर की तिथि को बढ़ाकर 5 नवम्बर कर दिया गया। बाकायदा इसके लिए एसई एके द्विवेदी ने एक शुद्धि पत्र जारी किया।

दिलचस्प बात यह है कि दुबारा भी टेंडर स्वीकृति की प्रत्याशा में ही निकाला गया है। जबकि जिला खनिज न्यास का मद जिले में ही है उसके लिए 24 घण्टे ही काफी है। इसके बाद भी आखिर यह कैसा स्वीकृति के प्रत्याशा का खुला खेल खेला जा रहा है। इस पर नाम न छापने की शर्त पर पीडब्ल्यूडी के पंजीकृत ठेकेदारों का कहना है कि यह स्वीकृति की प्रत्याशा का खेल सिर्फ कमीशनखोरी के लिए खेला जा रहा है। प्रयागराज अधीक्षण अभियंता वृत्त के पद पर रहते हुए एके द्विवेदी के ऊपर करोड़ों रुपए के घोटाले का गंभीर आरोप लगा था। 19 जनवरी को कौशांबी में 41 मार्गों के कार्यों का टेंडर कराया गया था।

उसमें अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के लिए एके द्विवेदी ने जमकर मनमानी किया था। अभियंताओ द्वारा टेंडर खुलने से निर्धारित तिथि से पहले अपने चहेते ठेकेदारों के टेंडर रेट में बदलाव किया गया था। अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार द्विवेदी ने अपने डिजिटल सिंगनेचर वाले डोंगल से अपने चहेते ठेकेदारों के टेंडर रेट में बदलाव कर दिया था। इससे कई टेंडर के रेट 20 से 21 प्रतिशत कम हो गये थे। इसपर शासन ने एके द्विवेदी को टेंडर प्रक्रिया से हटा दिया था। वहीं इनके प्रमोशन पर भी रोक लगा दी गई थी। अधीक्षण अभियंता प्रतापगढ़ वृत्त को टेंडर कमेटी कौशाम्बी एवं प्रयागराज का प्रभारी बना दिया गया था।

साथ ही अधीक्षण अभियंता प्रतापगढ़ वृत्त एन के यादव को सोनभद्र और मिर्जापुर का भी प्रभारी बना दिया गया था। उसके बाद अधीक्षण अभियंता वाराणसी वृत्त को टेंडर प्रक्रिया का प्रभारी बनाया गया। इसके बाद भी आखिर अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार द्विवेदी अपने हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के लिए खेल पर खेल कर रहे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि एसी अनिल द्विवेदी यह सब कुछ कमीशन खोरी के लिए कर रहे हैं। आखिर किसके आदेश पर एसी टेंडर प्रक्रिया में अपनी तुग़लकी फरमानों को लागू कर रहे हैं। टेंडर प्रक्रिया में एसी किसके अधिकार से दखलंदाजी कर रहे हैं।

इस पर पीडब्ल्यूडी विभाग मौन धारण किये हुए है। पीडब्ल्यूडी विभाग मिर्जापुर मंडल में टेंडर को लेकर ठेकेदारों, अधकारियों और माफियाओं का मजबूत काकश काम कर रहा है। जिसके चलते निष्पक्ष एवं पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया सम्पन्न कराना बेमानी है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रहरी एप्प से टेंडर डालने की पहल की। ताकि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सम्पन्न हो सके। साथ ही गड़बड़ी एवं कमीशनखोरी पर अंकुश लग सके। परन्तु एसई अनिल कुमार द्विवेदी योगी सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस की पॉलिसी की जड़ में मट्ठा डालने का काम कर रहे हैं।

एसी ने जो खेल प्रयागराज और कौशाम्बी में खेला अब वही खेल वह सोनभद्र में खुलेआम खेल रहे हैं। आखिर दागी एसी को किसका संरक्षण हासिल है। पीडब्ल्यूडी में होने वाला घोटाला और कमीशनखोरी एसी अनिल कुमार द्विवेदी का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही है। ऐसा आभास होता है कि जैसे अनियमित्ता और एसी महोदय का साथ चोली दामन का हो गया है। फ़िलहाल एसी महोदय नियमों को ताक पर रखकर टेंडर प्रक्रिया को सम्पन्न कराने पर अमादा है। इतना सब कुछ बेनक़ाब होने पर भी अभी तक किसी प्रकार की कोई जांच नहीं कि गई। समय की शिला पर खड़ी जनता मूकदर्शक बनी सबकुछ देख रही है। लगातार योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा टेंडर को लेकर पारदर्शी नीति अपनाया जा रहा। इसके बाद भी पीडब्ल्यूडी के अभियंताओ द्वारा कमीशनखोरी और टेंडर प्रक्रिया को अपने हिसाब से संचालित करने का तोड़ आखिर निकाल ही लिया जाता है।

आखिर योगी आदित्यनाथ सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि दागी एसी को टेंडर प्रक्रिया का बागडोर सौंप दिया जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार डाल डाल चल रही है तो एसी महोदय पात पात। कागज़ी घोषणाओं से अब तो बाहर आइये योगी जी। पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता के कारनामों की जांच कराइये योगी सरकार।

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