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Sonebhadra: साढ़े 17 वर्ष पूर्व हुई मारपीट में सिर की हड्डी टूटने के मामले में दोषी को 7 वर्ष की कैद

11 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद साढ़े 17 वर्ष पूर्व हुई मारपीट में सिर की हड्डी टूटने का मामला

पोल खोल सोनभद्र

(राजेश पाठक)

साढ़े 17 वर्ष पूर्व हुई मारपीट में सिर की हड्डी टूटने के मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम खलीकुज्ज्मा की अदालत ने दोषसिद्ध पाकर दोषी रामकिशुन को 7 वर्ष की कैद एवं 11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित की जाएगी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाना क्षेत्र के पाटी गांव निवासी नोहरी पुत्र भगत ने सीजेएम कोर्ट में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत दिए प्रार्थना पत्र में अवगत कराया था कि 12 जुलाई 2005 को शाम 5 बजे अपना खेत कोड़ रहा था तभी एकराय होकर अभियुक्तगण रामकिशुन, कुंभकरण,सुनेसर व लक्ष्मी सिंह उसके खेत पर लाठी डंडा से लैस होकर पहुंचे। जहां लक्ष्मी सिंह ने ललकारा कि तुम्हारी नातिन को इसने टोना लगा दिया जिससे वह मर गई। जान से मारकर इसे खत्म कर दो। इतना सुनकर रामकिशुन, कुंभकरण व सुनेसर ने जान मारने की नीयत से लाठी डंडे से मारकर उसे गिरा दिया।

तथा यह धमकी दिया कि इसे नदी में फेंक दो। शोरगुल की आवाज सुनकर उसकी पत्नी, बृजलाल, बलिराम आदि आ गए और घटना को देखा। उसके बाद पत्नी लोगों की मदद से घर ले आयी और दूसरे दिन चोपन थाने जाकर पत्नी ने सूचना दिया तो पुलिस ने कहा कि पहले दवा इलाज कराओ। जब दवा इलाज व एक्सरे जांच कराया गया तो सिर की हड्डी टूटी हुई पाई गई। पुनः थाने पर सूचना दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कि गई। तब सीजेएम कोर्ट के आदेश पर 31 अक्टूबर 2005 को रामकिशुन, कुंभकरण, सुनेसर व लक्ष्मी सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई।

मामले की विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने न्यायालय में चोपन थाना क्षेत्र के वसिनिया पारी गांव निवासी रामकिशुन पुत्र सुनेसर के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी रामकिशुन को 7 वर्ष की कैद एवं 11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वही अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता कुंवर वीर प्रताप सिंह ने बहस की।

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